थेनी जेल से 17 कैदियों के फरार होने के बाद तमिलनाडु की जेलों में सुरक्षा कड़ी, निगरानी मीनारों पर हथियारबंद जवान तैनात
- जेलकर्मियों की छुट्टियां रद्द, सुरक्षा ऑडिट के बाद कमियां दूर करने के लिए उठाए जाएंगे कदम
चेन्नई, 28 अक्टूबर (हि.स.)। तमिलनाडु के थेनी उप-जेल से 17 कैदियों के फरार होने की घटना के बाद राज्य सरकार ने जेलों की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। जेल विभाग ने नौ केंद्रीय जेलों, महिलाओं के लिए पांच विशेष जेलों और 13 जिला जेलों की निगरानी मीनारों पर चौबीसों घंटे सेल्फ-लोडिंग राइफल (एसएलआर) से लैस सुरक्षाकर्मियों की तैनाती शुरू कर दी है। साथ ही जेलकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें तत्काल ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस विभाग के अनुसार, जेलों की बाहरी परिधि में स्थित निगरानी मीनारों पर तैनात तमिलनाडु विशेष पुलिस बल के जवानों और जेलकर्मियों को एसएलआर राइफलें उपलब्ध कराई गई हैं। जेल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक केंद्रीय और जिला जेल में पांच से छह निगरानी मीनारें हैं। इन पर चौबीसों घंटे हथियारबंद जवान तैनात रहेंगे, जिससे कि कैदियों के फरार होने की किसी भी कोशिश को रोका जा सके। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों को फरार होने का प्रयास करने वाले कैदियों पर गोली चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मंगलवार को विभाग के शस्त्रागार से हथियार जारी किए गए थे। उसी दिन केंद्रीय जेलों की निगरानी मीनारों पर सशस्त्र जवानों की तैनाती शुरू कर दी गई, जबकि बुधवार से जिला जेलों में भी यह व्यवस्था लागू कर दी गई। इसके अलावा जेलकर्मियों को ड्यूटी के दौरान लाठियां साथ रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जेल एवं सुधार सेवाओं के महानिदेशक संदीप राय राठौर ने कैदियों के फरार होने की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि निगरानी मीनारों पर हथियारबंद कर्मियों की तैनाती सुरक्षा आवश्यकताओं और मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर की जाएगी।
राठौर ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से राज्य की जेलों का सुरक्षा ऑडिट किया जा रहा है। इस महीने के अंत तक इसकी रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों का विश्लेषण किया जाएगा और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि निगरानी मीनारों पर हथियार उपलब्ध कराना एहतियाती सुरक्षा उपायों का हिस्सा है।
जेल विभाग ने कैदियों के फरार होने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की है। इसके तहत जेलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।
तमिलनाडु में कुल 125 जेल हैं। इनमें नौ केंद्रीय जेलें, महिलाओं के लिए पांच विशेष जेलें, 13 जिला जेलें, पुरुषों के लिए 82 उप-जेलें, पुरुषों और महिलाओं के लिए दो-दो विशेष उप-जेलें, तीन खुली जेलें और युवा अपराधियों के लिए एक सुधार केंद्र शामिल हैं।
राज्य की जेलों में कुल 24,148 कैदियों को रखने की स्वीकृत क्षमता है, जबकि वर्तमान में लगभग 23,600 कैदी बंद हैं। कुल संख्या स्वीकृत क्षमता से कम होने के बावजूद कई जेलों में कैदियों की अधिक संख्या सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है।
विशेष रूप से चेन्नई, कोयंबटूर और मदुरै की केंद्रीय जेलों के साथ दक्षिण तमिलनाडु की कई जिला जेलों में कैदियों की संख्या स्वीकृत क्षमता के 115 से 150 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जेल विभाग इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है।----------
हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV

