तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक विधायक एसाकी सुब्बैया ने छोड़ी पार्टी, टीवीके में हुए शामिल

WhatsApp Channel Join Now
तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक विधायक एसाकी सुब्बैया ने छोड़ी पार्टी, टीवीके में हुए शामिल


चेन्नई, 26 मई (हि.स.)। तमिलनाडु में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) को मंगलवार को एक और बड़ा झटका लगा, जब अंबासमुद्रम विधानसभा क्षेत्र के विधायक एसाकी सुब्बैया ने अपने पद से इस्तीफा देकर तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

एसाकी सुब्बैया ने मंगलवार को अपने विधायक पद से इस्तीफा दिया। इस्तीफे के तुरंत बाद उन्होंने मंत्रियों सेंगोट्टैयन और एन. आनंद की मौजूदगी में टीवीके में शामिल होकर नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की। राजनीतिक हलकों में इसे अन्नाद्रमुक के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

इससे पहले भी अन्नाद्रमुक से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे कई विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। पेरुंदुरई विधायक जयकुमार, मदुरांतकम विधायक कुमारवेल और धारापुरम विधायक सत्यभामा पहले ही अपने पदों से इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों से अन्नाद्रमुक के भीतर असंतोष और बेचैनी बढ़ती दिखाई दे रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके लगातार अपने संगठनात्मक विस्तार और राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी क्षेत्रीय नेताओं और प्रभावशाली विधायकों को अपने साथ जोड़कर आगामी चुनावों के लिए मजबूत आधार तैयार करने में जुटी हुई है। ऐसे में अन्नाद्रमुक के सामने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट बनाए रखना बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले दो सीटों से चुनाव जीतने वाले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने भी त्रिची ईस्ट विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद राज्य में रिक्त विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन सीटों पर होने वाले उपचुनाव तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में कुछ और विधायक भी अन्नाद्रमुक छोड़कर टीवीके में शामिल हो सकते हैं। इस संभावित राजनीतिक संकट को देखते हुए पार्टी नेतृत्व लगातार रणनीतिक बैठकों में जुटा हुआ है। बताया जा रहा है कि सी.वी. शनमुगम के नेतृत्व में वरिष्ठ नेता लगातार मंथन कर रहे हैं, ताकि संगठन को मजबूत बनाए रखा जा सके और संभावित राजनीतिक नुकसान को कम किया जा सके।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV

Share this story