टीएमसी में टूट की अटकलें तेज, भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचे सुखेंदु शेखर सहित 14 सांसद
नई दिल्ली, 08 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) टूटती नजर आ रही है। पहले टीएमसी के कई विधायकों ने अलग गुट बनाया और अब यह टूट संसदीय दल तक पहुंच गई है। टूट की अटकलों के बीच सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के करीब 14 सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के घर पहुंचे और बंद कमरे में बैठक की।
बैठक में राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले सुखेंदु शेखर भी शामिल हुए। सुखेंदु ने आज ही राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे की घोषणा की थी। सूत्रों के अनुसार बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्य़मंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लव देब भी मौजूद रहे।
इस राजनीतिक हलचल के बीच तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी इंडी गठबंधन की बैठक के लिए दिल्ली में मौजूद हैं। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस छोड़ने वाले सुखेंदु शेखर ने मीडिया से बातचीत में आरजी कर अस्पताल मामले में तृणमूल कांग्रेस के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आरजी कर अस्पताल मामले पर सार्वजनिक रूप से उन्होंने राय रखी थी। तब से पार्टी के भीतर उन्हें नजरअंदाज किया जाने लगा। सुखेंदु ने कहा कि उन्होंने कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आंतरिक जांच की मांग की थी क्योंकि मेरा मानना था कि सबूतों को नष्ट करने में उनकी अहम भूमिका थी। इसके कारण उन्हें पार्टी से अलग थलग कर दिया गया था।
उल्लेखनीय है कि संसद में दलबदल विरोधी कानून को दरकिनार करने के लिए बागी गुट को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। लोकसभा में भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बाद टीएमसी चौथी सबसे बड़ी पार्टी है।
तृणमूल कांग्रेस के पास वर्तमान में लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सदस्य हैं।
पार्टी के अंदर बढ़ते असंतोष औऱ विरोध को देखते हुए पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं के साथ बैठक की और कुछ संगठनात्मक फेरबदल किए। चंद्रिमा भट्टाचार्य को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जिन्होंने सुब्रता बख्शी की जगह ली है।
खास बात यह है कि बैठक में बागी खेमे से कोई भी उपस्थित नहीं था। बैठक में मदन मित्रा, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, अशोक देब, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अभिषेक बनर्जी जैसे पुराने नेता ही मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

