महाराष्ट्र की ‘जीनत’ बाघिन ने सिमलीपाल में दिया चार शावकों को जन्म

WhatsApp Channel Join Now
महाराष्ट्र की ‘जीनत’ बाघिन ने सिमलीपाल में दिया चार शावकों को जन्म


चंद्रपुर, 03 जून (हि.स.)। महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से ओडिशा के सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित की गई बाघिन ‘जीनत’ ने चार शावकों को जन्म दिया है। इस घटना को सिमलीपाल में बाघ संरक्षण और आनुवंशिक विविधता बढ़ाने की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों ने इसे संरक्षण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में बाघों की आनुवंशिक विविधता बढ़ाने और उनकी आबादी को दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से बाघ स्थानांतरण कार्यक्रम शुरू किया गया था। सिमलीपाल देश के महत्वपूर्ण बाघ आवासों में से एक है। यहां पाए जाने वाले कुछ बाघों में विशेष आनुवंशिक गुणों के कारण गहरे काले रंग की धारियां दिखाई देती हैं, जिन्हें ‘मेलानिस्टिक टाइगर’ कहा जाता है। इसी कारण बाहरी क्षेत्रों से बाघों को लाकर आनुवंशिक विविधता बढ़ाने की योजना बनाई गई थी।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की मंजूरी के बाद ओडिशा वन विभाग ने महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से बाघों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की। इस अभियान के तहत अक्टूबर-नवंबर 2024 में ‘जमुना’ और ‘जीनत’ नामक दो बाघिनों को सिमलीपाल में छोड़ा गया था। हालांकि, स्थानांतरण के कुछ समय बाद ही जीनत सिमलीपाल से बाहर निकल गई और झारखंड तथा पश्चिम बंगाल के जंगलों में भटकती रही। उसकी लंबी यात्रा ने वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षणकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। वन विभाग के लगातार प्रयासों के बाद उसे फिर से पकड़ लिया गया और 1 जनवरी 2025 को सिमलीपाल के भीतर 8 हेक्टेयर क्षेत्र वाले संरक्षित बाड़े में रखा गया।

कई महीनों तक अनुकूलन प्रक्रिया पूरी करने के बाद अप्रैल 2025 में जीनत को दोबारा जंगल में छोड़ दिया गया। इसके बाद उसने सिमलीपाल के मुख्य वन क्षेत्र में अपना क्षेत्र स्थापित किया और जनवरी 2026 में एक स्थानीय नर बाघ के साथ उसका संयोग हुआ। इसी संयोग के बाद जीनत ने 4 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। वन विभाग के अनुसार, शावकों की उम्र वर्तमान में लगभग तीन से चार सप्ताह है। बीती 28 मई को कैमरा ट्रैप में जीनत अपने चारों शावकों के साथ दिखाई दी, जिसके बाद इस संरक्षण परियोजना की सफलता पर मुहर लग गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी दूसरे राज्य से स्थानांतरित की गई बाघिन का नए आवास में सफलतापूर्वक प्रजनन कर शावकों को जन्म देना बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे सिमलीपाल में बाघों की संख्या बढ़ाने और उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जीनत की कहानी केवल एक बाघिन की नहीं, बल्कि वैज्ञानिक योजना, वन विभाग की सतत मेहनत और सफल बाघ संरक्षण मॉडल की प्रेरणादायक मिसाल है। चार नए शावकों के जन्म से सिमलीपाल के जंगलों में नई उम्मीद जगी है और देश के बाघ संरक्षण अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है।

----------------------------------

हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुलकर्णी

Share this story