बिहारी बिहारिन की रे मोपै यह छबि बरनी ना जाय...

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बिहारी बिहारिन की रे मोपै यह छबि बरनी ना जाय...


बिहारी बिहारिन की रे मोपै यह छबि बरनी ना जाय...


- ठाकुर बांके बिहारी के दरबार में शुरू हुई बहुरंगी बौछार

मथुरा, 27 फरवरी (हि.स.)। ठाकुर बांके बिहारी महाराज के दरबार में रंगभरनी एकादशी पर सुबह से देरसायं तक बहुरंगी बौछार निरंतर जारी रही। दिव्य महोत्सव का शुभारम्भ करते हुए सेवायतों ने सबसे पहले सफेद पोशाक भूषण धारण कर मंदिर जगमोहन में सिंहासन पर विराजमान ठाकुरजी के श्रीचरणों में सोने-चाँदी की पिचकारी से केसरिया रंग समर्पित किया। भगवान के प्रतिनिधि स्वरूप सेवायतों ने रजत पिचकारी से भक्तों पर टेसू के फूल से बना रंग बरसाया जाने लगा। भगवान के कृपारूपी रंग में सराबोर होकर असंख्य भक्तजन आनंद के सागर में डूबते हुए बिहारी बिहारिन की रे मोपै यह छबि बरनी ना जाय जैसे प्राचीन होली के पद और रसियाओं का गायन करने लगे। रंगभरनी एकादशी पर मंदिर में चहुँओर इत्र, गुलाबजल, केसर की मनमोहक सुगंध के बीच भक्ति और मरतों का अदभुत संगम नजर आ रहा था। मंदिर से जुड़ी लगभग दो दर्जन से अधिक गलियों में ढोलक, मृदंग मंजीरा व चिमटा जैसे पुरातन वाध्ययंत्रों की मधुर गूँज के मध्य नाचते गाते अद्धालुओं की टोलियाँ निरंतर आगे बढ़ती जा रहीं थी। सभी भक्त अपने आराध्य श्री बांकेबिहारी महाराज के मंदिर में बरसते रसरंग की मात्र एक बूंद पाने को लालायित दिखाई दे रहे थे। इस माहौल से ब्रज-वृन्दावन में आज पुनः द्वापर युगीन नजारा साकार हो रहा था।

रंग भरनी एकादशी पर मंदिर में अबीर गुलाल के साथ टेसू के रंगों की बौछार में हर श्रद्धालु भीगने के लिए विवश दिखाई दिया। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर मंदिर डीएम चंद्र प्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षा और वातायात व्यवस्थाओं का जायजा लिया। श्री हरिदास पीठ में श्री हरिदासचितारी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने ट्स्ट संस्थापक इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी के सानिध्य में भक्तों को जलेबी का विशेष भोग तथा प्रसादी गुलाल वितरित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार

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