सुखविंदर सिंह सुक्खू की डॉ. जितेन्द्र सिंह से मुलाकात, लैवेंडर खेती एवं एस्ट्रो-टूरिज्म पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 09 सितंबर (हि.स.)।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। बैठक में हिमाचल प्रदेश में मौसम पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत बनाने, लैवेंडर खेती के विस्तार, ग्राम पंचायत स्तर पर मौसम पूर्वानुमान, स्पीति में हाई-एल्टीट्यूड स्काई ऑब्जर्वेटरी तथा राज्य कैडर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश के लिए पांच डॉप्लर वेदर रडार उपलब्ध कराने के निर्णय की सराहना की और इसके लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने राज्य की मौसम निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस मौके पर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहाड़ी और प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील हिमाचल प्रदेश में प्रभावी अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करना बेहद जरूरी है। इसके लिए मौसम अवलोकन नेटवर्क के विस्तार पर भी चर्चा की गई।
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में कुफरी, जोत और मुरारी देवी में तीन डॉप्लर वेदर रडार हैं, जबकि दो अन्य रडार स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा लाहौल-स्पीति और किन्नौर में भी नए रडार लगाने की योजना पर काम चल रहा है। राज्य में 28 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, 64 ऑटोमैटिक रेन गेज और 84 दैनिक वर्षा निगरानी केंद्र पहले से संचालित हैं। प्रस्तावित विस्तार के तहत 20 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, 24 ऑटोमैटिक रेन गेज, 21 ऑटोमैटिक स्नो गेज और एक रेडियो विंड सिस्टम स्थापित किए जाएंगे।
बैठक में भारतीय मौसम विभाग की ‘मौसमग्राम’ सेवा की भी समीक्षा की गई, जिसके माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों सहित आम लोगों तक स्थानीय मौसम संबंधी जानकारी पहुंचाना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर अरोमा मिशन के तहत हिमाचल में लैवेंडर खेती के विस्तार पर भी चर्चा की। मिशन के तीसरे चरण में मंडी जिले की बलद्वाड़ा तहसील के अपर भामला क्षेत्र में 20 हजार लैवेंडर पौधे लगाए गए हैं और लगभग 150 किसानों को इस पहल से जोड़ा गया है। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं तथा अगले चरण में खेती का दायरा बढ़ाने और किसानों को डिस्टिलेशन यूनिट उपलब्ध कराने की योजना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

