सिक्किम भारत की पहली कागज रहित न्यायपालिका घोषित

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सिक्किम भारत की पहली कागज रहित न्यायपालिका घोषित


सिक्किम भारत की पहली कागज रहित न्यायपालिका घोषित


सिक्किम भारत की पहली कागज रहित न्यायपालिका घोषित


गंगटोक, 01 मई (हि.स.)। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सिक्किम को देश की पहली कागज रहित राज्य न्यायपालिका घोषित किया। राजधानी गंगटोक के चिंतन भवन में शुक्रवार से शुरू तकनीकी और न्यायिक शिक्षा पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य न्यायाधीश ने उक्त घोषणा की। साथ ही उन्होंने न्यायमूर्ति ए. मुहम्मद मुस्ताक को बधाई दी, जिसके तहत सिक्किम उच्च न्यायालय ने देश का पहला कागज रहित उच्च न्यायालय होने का गौरव हासिल किया।

सिक्किम उच्च न्यायालय और भारत के उच्चतम न्यायालय की ई-समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह सम्मेलन दो दिनों तक राजधानी के चिंतन भवन और सम्मान भवन में आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य न्याय प्रणाली को मजबूत करने और कानूनी शिक्षा के विकास में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर चर्चा करना है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित न्यायमूर्ति ने कहा कि दूरस्थ भूगोल के कारण अदालतों तक पहुंच मुश्किल होता है और बुनियादी ढांचे के विकास एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग के साथ न्याय तक पहुंच अब आसान होती जा रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल मार्ग के माध्यम से नागरिकों ने सीधे न्यायिक निकाय से जुड़ना शुरू कर दिया है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि लक्ष्य एक ऐसी न्याय प्रणाली का निर्माण करना है जहां न्याय के लिए कठिन शारीरिक यात्रा की आवश्यकता न हो और जहां याचिकाएं व्यक्तियों की आवाजाही के बिना आगे बढ़ सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल सुधार केवल एक सैद्धांतिक मामला नहीं है, बल्कि कानून के शासन को बनाए रखने के लिए एक व्यावहारिक आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी के एकीकरण का उद्देश्य भौगोलिक बाधाओं को दूर करना है, चाहे वे कठिन भूभाग, आर्थिक सीमाओं या दूरी के कारण उत्पन्न हों। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास यह सुनिश्चित करते हैं कि न्याय की पहुंच शहरी केंद्रों तक ही सीमित न हो, बल्कि उत्तरी सिक्किम, पश्चिमी घाट और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों तक समान रूप से विस्तारित हो।

उन्होंने इस अनूठी पहल के लिए न्यायमूर्ति ए. मुहम्मद मुस्ताक को बधाई दी, जिसके तहत सिक्किम उच्च न्यायालय ने देश का पहला कागज रहित उच्च न्यायालय होने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका धीरे-धीरे कागज आधारित प्रणालियों के युग से एक जीवंत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की ओर बढ़ रही है, जहां ई-कोर्ट परियोजना जैसी पहलों ने पक्षों और कानून के बीच संबंधों को फिर से परिभाषित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी तरह से डिजिटल प्रणाली की दिशा में यात्रा अभी भी जारी है।

उन्होंने सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के साथ-साथ मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग और सभी हितधारकों को कागज रहित उच्च न्यायालय की उपलब्धि और सिक्किम को न्यायिक नवाचार के राष्ट्रीय मानचित्र पर रखने के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार न्यायिक सुधारों और डिजिटल शासन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रौद्योगिकी के उपयोग से न्याय तक पहुंच में और सुविधा होगी।

उन्होंने कहा कि सिक्किम न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, दूरदराज के क्षेत्रों में अदालतों तक पहुंच बढ़ाने और संस्थागत तंत्र के माध्यम से कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई पहलों का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। उन्होंने समावेशी बने रहने के लिए तकनीकी प्रगति की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि पहुंच या डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण कोई भी नागरिक पीछे नहीं रहना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन के विचार-विमर्श एक आधुनिक, उत्तरदायी और नागरिक केंद्रित न्यायिक प्रणाली के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। सिक्किम को कागज रहित न्यायपालिका घोषित किए जाने को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए उन्होंने इस सफलता के लिए न्यायपालिका को बधाई दी और कहा कि यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / Bishal Gurung

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