किसान क्रेडिट कार्ड ने किसानों को दी राहतः शिवराज चौहान

WhatsApp Channel Join Now
किसान क्रेडिट कार्ड ने किसानों को दी राहतः शिवराज चौहान


नई दिल्ली, 21 अप्रैल (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को साहूकारी, ऊंचे ब्याज, जटिल कर्ज प्रक्रिया से राहत दिलाने के लिए कृषि वित्त तंत्र को और अधिक सरल, व्यावहारिक, मानवीय और परिणामोन्मुख बनाना होगा। उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड ने किसानों को राहत दी है लेकिन आवश्यकता है कि तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग हो, बैंकिंग व्यवस्था ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप मजबूत बने, योजनाएं जमीन पर व्यावहारिक रूप से लागू हों। जिससे छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत खेती जैसे मॉडल को आगे बढ़ाया जा सके।

सिविल सेवा दिवस के अवसर पर मंगलवार को विज्ञान भवन में कृषि पर आयोजित पैनल चर्चा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज चौहान ने कहा कि केसीसी और बैंकिंग ऋण सुविधाओं ने किसानों को राहत पहुंचाई है, ट्रैक्टर, सिंचाई, बीज और दूसरी जरूरतों के लिए ऋण मिलने से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने यह भी साफ कहा कि बैंक से ऋण लेना आज भी गांवों में आसान नहीं है क्योंकि किसान को कागजों, अभिलेखों, तहसील, पटवारी और कई स्तरों की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है इसलिए ऋण प्रक्रिया का सरलीकरण बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा कि तकनीक का बेहतर उपयोग जरूरी है लेकिन उसका इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गेहूं खरीद के दौरान कई जगह सैटेलाइट सत्यापन में गड़बड़ी जैसी स्थिति आई, जिसके कारण किसान परेशान होते रहे; इसलिए तकनीक की सीमाओं को समझते हुए कृषि विभाग, नाबार्ड, आरबीआई और संबंधित संस्थाओं को मिलकर बेहतर और व्यावहारिक व्यवस्था पर काम करना चाहिए।

उन्होंने ग्रामीण बैंकों और शाखाओं में कर्मचारियों की कमी की बात करते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में योजनाओं का दबाव बहुत अधिक है, खातों में सीधे भुगतान की संख्या बढ़ी है। मनरेगा की मजदूरी, किसान सम्मान निधि और अन्य रकम सीधे खाते में आती है, लेकिन सीमित बैंक कर्मियों पर इतना काम रहता है कि वे कई बार ढंग से सेवा नहीं दे पाते; इसलिए वर्तमान जरूरतों के अनुसार बैंक स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता पर गंभीर विश्लेषण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान कई बार 8 से 10 किलोमीटर चलकर बैंक पहुंचता है, लेकिन लंबी लाइन और सीमित स्टाफ के कारण उसका काम नहीं हो पाता। ऐसे में उसका समय, श्रम और रोज़ी- तीनों प्रभावित होते है। इसलिए काम के दबाव और जरूरत के हिसाब से मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

शिवराज चौहान ने छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक-दो या ढाई एकड़ वाले छोटे किसान की आजीविका केवल अनाज पर नहीं चल सकती; उसे फल, सब्जी, पशुपालन, बकरी पालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन जैसी दो-चार गतिविधियां साथ लेकर चलनी होंगी, तभी उसकी आय स्थायी रूप से बढ़ सकेगी। यदि किसान गाय-भैंस पालना चाहता है, अच्छी नस्ल का पशु लेना चाहता है, मछली पालन करना चाहता है, तो उसके लिए भी पूंजी चाहिए। इन क्षेत्रों में केसीसी लागू होने के बावजूद लाभार्थियों की संख्या सीमित है, इसलिए विभिन्न योजनाओं और संसाधनों के कन्वर्जेंस के जरिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग को सफल और व्यवहारिक बनाना आवश्यक है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

Share this story