पीओके में हो रहे अत्याचारों पर भारत को उठानी चाहिए आवाज : शांता कुमार
शिमला, 13 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चल रहे जनआंदोलनों और वहां की जनता पर कथित दमनात्मक कार्रवाई को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पीओके से लगातार ऐसे समाचार सामने आ रहे हैं, जिनमें स्थानीय लोग पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि इन आंदोलनों को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
शांता कुमार ने शनिवार को एक बयान में कहा कि विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार पीओके के कई क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और गोलीबारी की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि एक स्थान पर गोलीबारी में कई लोगों की मौत होने की सूचना भी मिली है। उनके अनुसार, वहां के लोग लंबे समय से आर्थिक पिछड़ेपन, बेरोजगारी और विकास के अभाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिसके कारण असंतोष बढ़ रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भारतीय सेना पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेने की दिशा में आगे बढ़ रही थी, लेकिन तत्कालीन परिस्थितियों में युद्धविराम लागू होने के कारण कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में रह गया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से पीओके को अपना अभिन्न अंग मानता रहा है और समय-समय पर इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करता रहा है।
शांता कुमार ने कहा कि पीओके में रहने वाले लगभग 50 लाख लोग भारत के नागरिक हैं और उनके साथ हो रहे कथित अत्याचारों के मुद्दे पर भारत को मुखर होकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने इस क्षेत्र के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते वहां के लोगों में असंतोष बढ़ा है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पीओके में रहने वाले लोगों के अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां भारत के लिए इस विषय पर अपनी स्थिति को और मजबूती से रखने का अवसर प्रदान करती हैं।
शांता कुमार ने यह भी कहा कि ब्रिटेन के कुछ सांसदों द्वारा पाकिस्तान से पीओके खाली कर भारत को सौंपने की मांग किए जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार की आवाजें उठ रही हैं, तो भारत को भी इस विषय पर स्पष्ट और सशक्त रुख अपनाना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

