ममता के धरने में सिर्फ सात विधायक और दो सांसद पहुंचे, तृणमूल में बढ़ी अंदरूनी संकट की चर्चा

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ममता के धरने में सिर्फ सात विधायक और दो सांसद पहुंचे, तृणमूल में बढ़ी अंदरूनी संकट की चर्चा


कोलकाता, 02 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा मंगलवार को कोलकाता के धर्मतल्ला स्थित वाई चैनल पर आयोजित धरना कार्यक्रम में पार्टी के सीमित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। हालिया विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद भाजपा सरकार के खिलाफ आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन में तृणमूल के केवल सात विधायक और दो सांसद ही शामिल हुए।

धरना कार्यक्रम में मौजूद विधायकों में चंद्रिमा भट्टाचार्य, सोवनदेब चट्टोपाध्याय, नायना बंद्योपाध्याय, मदन मित्रा, अशोक देब, असीमा पात्रा और बिमान बनर्जी शामिल थे। वहीं सांसदों में डोला सेन और कल्याण बनर्जी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

तृणमूल कांग्रेस के पास हालिया चुनाव के बाद भी बड़ी संख्या में निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। 80 विधायक हैं। ऐसे में पार्टी प्रमुख के महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम में सीमित संख्या में विधायकों और सांसदों के पहुंचने को लेकर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति पार्टी के भीतर चल रही असंतोष और मतभेद की चर्चाओं को और बल दे सकती है।

धरने को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में तृणमूल कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है तथा पार्टी को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। ममता ने कहा कि वह कठिन समय में पार्टी कार्यकर्ताओं का साथ नहीं छोड़ेंगी और विरोध जारी रखेंगी।

उन्होंने विधानसभा में विपक्ष के नेता की मान्यता और कथित फर्जी हस्ताक्षर विवाद का भी उल्लेख किया। ममता ने कहा कि यदि किसी को तृणमूल विधायकों के हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर संदेह है तो उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में इस बात की चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी 50 से 55 विधायकों के समर्थन का पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंप कर उन्हीं विधायकों को लेकर असल टीएमसी होने का दावा कर सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

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