नर सेवा ही नारायण सेवा, सेवा से होता है राष्ट्र निर्माणः उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि “हमारी सभ्यतागत परंपरा ने हमेशा हमें सिखाया है- नर सेवा ही नारायण सेवा है, सेवा से होता है राष्ट्र निर्माण।” उन्होंने कहा कि भारत के महान संतों और विचारकों ने लोगों को व्यक्तिगत स्वार्थ व संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर समाज और दूसरों के कल्याण के लिए काम करने की प्रेरणा दी है। वे शुक्रवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में संत ईश्वर फाउंडेशन द्वारा आयोजित 11वें संत ईश्वर सम्मान-2026 समारोह को संबोधित कर रहे थे।
राष्ट्रीय सेवा भारती की लगातार 11 वर्षों से इस सम्मान को जारी रखने के लिए सराहना करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि विकास को केवल आर्थिक वृद्धि, बुनियादी ढांचे या तकनीकी प्रगति से नहीं मापा जा सकता। वास्तव में विकसित भारत वह होगा, जहां प्रत्येक नागरिक को सम्मान, अवसर और आशा का अनुभव हो। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी है और सेवा संगठनों तथा सेवा कार्यों से जुड़े व्यक्तियों का योगदान जमीनी स्तर पर राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्वच्छ भारत मिशन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जनभागीदारी ने एक सरकारी कार्यक्रम को जन आंदोलन में बदलने का काम किया।
उपराष्ट्रपति ने नशीली दवाओं और नशे की लत को युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अगस्त में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत की, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘नशा मुक्त भारत 2029 रोडमैप’ लॉन्च किया। उन्होंने इन दोनों पहलों को नशामुक्त भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास के साथ करुणा, चरित्र और सामाजिक उत्तरदायित्व भी जरूरी है। उन्होंने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि उनके जीवन और कार्यों से विशेष रूप से युवा प्रेरणा लेंगे और समाज के कल्याण के लिए आगे आएंगे। उन्होंने युवाओं में सेवा भाव और कर्तव्य बोध को मजबूत करने का आह्वान किया।
11वें संत ईश्वर सम्मान-2026 के अवसर पर संत ईश्वर सम्मान फाउंडेशन के अध्यक्ष कपिल खन्ना ने सम्मान के लिए चयन प्रक्रिया की विशेषता बताई। उन्होंने कहा कि इस सम्मान के लिए कोई व्यक्ति स्वयं अपना नामांकन नहीं कर सकता।
कपिल खन्ना ने कहा कि फाउंडेशन का मानना है कि जो व्यक्ति स्वयं को सम्मान के लिए नामित करता है, उसके पीछे सेवा की भावना नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि समाज के लिए समर्पित लोग अपने काम में लगे रहते हैं और उन्हें प्रचार या सम्मान की चिंता नहीं होती।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

