संस्कृत भाषा से ही भारत का भाग्योदय होगा : स्वांत रंजन
लखनऊ, 02 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने कहा कि भारत के भाग्य का उदय संस्कृत भाषा से ही होगा। संस्कृत भारती इस कार्य को द्रुत गति से कर रही है। उन्होंने कहा कि संस्कृत से ही भारत का परिचय है। संस्कृत भाषा प्राचीन तो है ही, साथ में निर्वाचीन भी है।
वह शुक्रवार को निरालानगर स्थित जे.सी.गेस्ट हाउस में संस्कृत भारती कानपुर प्रांत और अवध प्रांत के आवासीय शीतकालीन प्रबोधन वर्ग के शुभारम्भ अवसर पर बोल रहे थे।
स्वान्त रंजन ने कहा कि वर्ग में सामूहिक जीवन जीने का कौशल सीखकर संस्कृत भाषा का सामूहिक कार्य कर समाज में संस्कृत कार्य कर भारत की अपनी मूल भाषा एवं अपनी संस्कृति को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाकर भारत माता को परम वैभव की ओर ले जाने का संकल्प लें।
संस्कृत भारती अवध प्रांत के प्रांत मंत्री अनिल ने बताया कि संगठन के संवर्धन तथा कार्यकर्ताओं के समायोजन के लिए समय-समय पर ऐसे विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने यह कहा कि यह वर्ग एक जनवरी से आरंभ होकर 9 जनवरी तक आयोजित किया गया है, जिसमें कानपुर और अवध प्रांत के विभिन्न कार्यकर्ता एवं वर्गार्थी उपस्थित हैं और रहेंगे। इस कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर लगभग 50 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर संस्कृत भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संगठन मंत्री प्रमोद पंडित, संस्कृत भारती के क्षेत्र प्रचार प्रमुख जेपी सिंह, विशिष्ट अतिथि के रुप में अवध प्रांताध्यक्ष डॉ.चन्द्रभूषण त्रिपाठी,डॉक्टर श्यामलेश और वर्गाधिकारी के रूप में श्रम विभाग के पूर्व उप निदेशक इंजीनियर धर्मेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

