संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय ‘प्रणव’ का सोमवार को भव्य उद्घाटन, वैश्विक विस्तार का बनेगा केंद्र
- उद्घाटन से पहले तीन दिवसीय वैदिक अनुष्ठान का शुभारंभ - सौ आचार्यों के वैदिक मंत्रोच्चार से बना आध्यात्मिक वातावरण - ‘प्रणव’ भवन संस्कृत के वैश्विक प्रसार का संकल्प केंद्र बनेगाः नीतिन नवीन
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (हि.स.)। संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में अग्रणी संगठन संस्कृत भारती के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय ‘प्रणव’ का उद्घाटन सोमवार को होगा। राजधानी के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित इस अत्याधुनिक भवन का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत करेंगे। यह भवन संस्कृत भाषा के पुनरुत्थान, शोध एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके प्रसार के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। उद्घाटन से पूर्व शनिवार को तीन दिवसीय वैदिक अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। देशभर से आए लगभग 100 आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
आचार्य सुधीर, प्रो. रामराज उपाध्याय एवं प्रो. परमानंद भारद्वाज के मार्गदर्शन में वास्तु पूजन, मंडल रचना, कलश स्थापना और नवग्रह शांति जैसे अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं। संस्कृत भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय एवं दिल्ली प्रांत अध्यक्ष डॉ. वागीश भट्ट ने सपत्नीक मुख्य यजमान के रूप में पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन ने कहा कि ‘प्रणव’ भवन संस्कृत के वैश्विक प्रसार का संकल्प केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह केंद्र डिजिटल माध्यमों से संस्कृत शिक्षण, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाषा के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
संस्कृत भारती के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्रीशदेव पुजारी के अनुसार ‘प्रणव’ भवन को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, जिससे संगठन की गतिविधियों को और अधिक गति मिलेगी।
मुख्य उद्घाटन समारोह में देशभर से प्रतिनिधि, शिक्षाविद् और संस्कृत प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल होंगे। यह आयोजन संस्कृत के नवजागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

