लोकतंत्र केवल चुनावी राजनीति ही नहीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिकों की गरिमा है : गजेंद्र सिंह शेखावत

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लोकतंत्र केवल चुनावी राजनीति ही नहीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिकों की गरिमा है : गजेंद्र सिंह शेखावत


नई दिल्ली, 25 जून (हि.स.)। आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गुरुवार को कहा कि लोकतंत्र चुनावी राजनीति ही नहीं, अभिव्यक्ति तथा असहमति की स्वतंत्रता, स्वतंत्र मीडिया, नागरिकों की गरिमा और संविधान की सर्वोच्चता है।

गजेंद्र शेखावत ने आज नई दिल्ली स्थित अपने परिसर में सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के माध्यम से संवैधानिक हत्या दिवस को संबोधित किया।

यह कार्यक्रम 1975 में लागू आपातकाल के पचास वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों और नागरिकों के अधिकारों के महत्व के प्रति जन जागरूकता को सुदृढ़ करना था।

शेखावत ने कहा कि लोकतंत्र भारत के डीएनए में बसा है और यह आयोजन स्वतंत्रता के गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही चुनौतियों के बावजूद, यह अवसर (आपातकाल) भारत के लोकतंत्र की दृढ़ता और अटूटता का प्रतीक है।

शेखावत ने कहा कि आपातकाल ने हमें लोकतंत्र, स्वतंत्रता और संविधान की शक्ति तथा कीमत पर विचार करने और उसे सही मायने में समझने का अवसर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ लोकतंत्र अमर रहे प्रदर्शनी के भ्रमण से हुआ, जिसमें आपातकाल के प्रभाव को उजागर किया गया और लोकतांत्रिक संस्थानों और संवैधानिक स्वतंत्रता की रक्षा के महत्व पर जोर दिया गया। इसके अलावा, डिजिटल जिला भंडार प्रदर्शनी भी प्रदर्शित की गई। जिले के सूक्ष्म स्तर पर भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े लोगों, घटनाओं, स्थानों की कहानियों को खोजने और दस्तावेजीकरण करने के प्रयास से डिजिटल जिला भंडार (डीडीआर) का निर्माण हुआ है। यह सब 'आजादी का अमृत महोत्सव' (एकेएएम) के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

प्रदर्शनी का उद्घाटन 24 जून (बुधवार) को सीसीआरटी के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर ने किया, जिसमें विभिन्न विद्यालयों और गैर सरकारी संगठनों के एक हजार से अधिक छात्रों ने भाग लिया। इस अवसर पर संविधान हत्या दिवस पर एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

लोकतंत्र की भावना को संगीतमय श्रद्धांजलि - मौन से आवाज तक, अंधकार से भोर तक शीर्षक से एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति सीसीआरटी के विद्वानों द्वारा बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी के निर्देशन में प्रस्तुत की गई, जिसमें भारतीय लोकतंत्र के लचीलेपन को श्रद्धांजलि दी गई।

इस कार्यक्रम में डिजिटल डिस्ट्रिक्ट रिपॉजिटरी (डीडीआर) अभिनंदन समारोह भी शामिल था। डिजिटल डिस्ट्रिक्ट रिपॉजिटरी एक राष्ट्रीय पहल है जिसका उद्देश्य भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी जिला स्तरीय कहानियों, घटनाओं, व्यक्तित्वों, स्थानों का दस्तावेजीकरण और संरक्षण करना है। सीसीआरटी ने स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित कई स्थानीय वृत्तांतों के संग्रह और दस्तावेजीकरण के माध्यम से इस पहल में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

समारोह के दौरान, राष्ट्र के प्रति उनके योगदान के लिए वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी, जीवंत व्यक्तित्व शेषराव लक्ष्मणराव खोट और येद्दुला सूर्यनारायण रेड्डी तथा उनके परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया गया। डिजिटल डिस्ट्रिक्ट रिपॉजिटरी को समृद्ध बनाने में योगदान देने वाले शिक्षकों, शोधकर्ताओं और संस्थानों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में डिजिटल डिस्ट्रिक्ट रिपॉजिटरी पर आधारित एक प्रदर्शनी, वृत्तचित्रों की स्क्रीनिंग और रिपॉजिटरी की कहानियों से प्रेरित कलाकारों द्वारा रेखाचित्र प्रस्तुतियाँ शामिल थीं।

कार्यक्रम के दौरान संस्कृति मंत्रालय की राष्ट्रव्यापी सेवा पर्व पहल के अंतर्गत निर्मित कलाकृतियों की एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। विक्षित भारत के रंग, कला के संग विषय पर आयोजित इस पहल ने देश भर में कलात्मक गतिविधियों के माध्यम से सांस्कृतिक गौरव, रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा दिया।

इस मौके पर संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल, आईएनजीसीए के अध्यक्ष राम बहादुर राय, संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव समर नंदा, संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव के.के. मिश्रा, सीसीआरटी के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर और कलाकार सहित अन्य अतिथिगण मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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