साध्वी ऋतंभरा ने मप्र के धार स्थित भोजशाला में किए मां वाग्देवी के दर्शन, बोलीं- 'लौटेगा राजा भोज का वैभव'
- श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम और मां वाग्देवी का लगाया जयघोष
भोपाल/धार, 06 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला में गुरुवार को पद्म भूषण से सम्मानित साध्वी ऋतंभरा ने पहुंचकर मां वाग्देवी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दर्शन-पूजन किया। केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की मौजूदगी में हुए इस धार्मिक आयोजन के दौरान साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि भोजशाला का सत्य अग्नि परीक्षा से गुजरकर सामने आया है और आने वाले समय में यहां राजा भोज के समय जैसा वैभव पुनः लौटेगा।
धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में गुरुवार को साध्वी ऋतंभरा के आगमन पर श्रद्धालुओं और समर्थकों ने जय श्रीराम और मां वाग्देवी के जयघोष से वातावरण को धर्ममय बना दिया। केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर के साथ साध्वी ऋतंभरा ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना कर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। दर्शन के उपरांत उन्होंने कहा कि भगवती की कृपा से लंदन में रखी मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा शीघ्र ही अपने मूल स्थान पर वापस आएगी। उन्होंने भोजशाला के संघर्ष को हिंदू समाज की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि इससे काशी और मथुरा के मार्गों पर भी सत्य की विजय का रास्ता प्रशस्त होगा।
मीडिया से बात करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि जिस तरह भक्त प्रह्लाद अग्नि परीक्षा से निर्विकार निकले थे, उसी तरह भोजशाला का इतिहास भी अक्षुण्ण रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन की शक्ति को आंधियां बुझा नहीं सकतीं, यह वही भूमि है जहां ज्ञान, विज्ञान, संगीत और संस्कृति का उत्कर्ष हुआ था। इसके साथ ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली युवतियों को भी मर्यादा का पालन करना चाहिए। आंदोलन के नाम पर अभद्र व अश्लील भाषा का प्रयोग उसकी गरिमा को कम करता है, ऐसे तत्वों पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
साध्वी ऋतंभरा के भोजशाला प्रवास को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। परिसर में दर्शन के लिए सुबह से ही आम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। पूजन संपन्न होने के बाद उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए आह्वान किया कि भारतीय संतानों को संस्कारों के गंगाजल से सींचा जाना चाहिए, ताकि धार की यह पवित्र भूमि एक बार फिर पूरे भारत का सांस्कृतिक नेतृत्व कर सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

