वरदान स्वरूप है संघ की शाखा : आलोक कुमार

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वरदान स्वरूप है संघ की शाखा : आलोक कुमार


पटना, 26 अप्रैल (हि.स.)। संघ की शाखा एक अमोघ वरदान है। यहां व्यक्ति खेल-खेल में ही देशभक्ति और समाज संगठन का संस्कार सीख जाता है। यह व्यक्ति निर्माण की पाठशाला है। उक्त विचार पटना महानगर के एकत्रीकरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने व्यक्त किया।

पटना के शाखा मैदान में शाम के एकत्रीकरण में उन्होंने कहा कि कलयुग में संगठन शक्ति की महत्ता होती है। सतयुग में ज्ञान शक्ति, त्रेता युग में मंत्र शक्ति और द्वापर में युद्ध शक्ति का प्रभाव था। कलयुग में वही व्यक्ति, संगठन या देश शक्तिशाली है, जिसके पीछे जन बल खड़ा है। कलयुग में कैसे संगठन खड़ा करना है इसकी व्यवस्था ऋग्वेद के श्लोक में दी गई है। आज जिसको भी संगठन करना है, उसको साथ-साथ चलना और साथ-साथ बोलना होगा। देश की ताकत संगठन में है, इसलिए समाज का संगठित होना आवश्यक है।

उन्होंने संघ शताब्दी वर्ष की चर्चा करते हुए कहा कि संघ के प्रयास से आज हिंदू सम्मेलन में चार करोड़ से अधिक लोग जुटे हैं। 5 हजार से अधिक सद्भाव बैठकें हो चुकी है। इसी प्रकार 5 हजार से अधिक प्रमुख नागरिक संगोष्ठी हो गई है। विशेष संपर्क विभाग द्वारा 10 हजार से अधिक देश के प्रमुख लेखक, कवि, पत्रकार, कलाकार, राजनीतिज्ञों इत्यादि से संपर्क किया जा चुका है।

संघ के संगठन कौशल्य के कारण अमेरिका के चार विश्वविद्यालयों में इस पर शोध हो रहा है। चीन अपने विशेषज्ञों को भेज कर संघ के व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला पर शोध कर रहा है। भारतवर्ष में लगभग पौने दो लाख ग्राम है। इस बार शताब्दी वर्ष के अंत में विजयदशमी के समय संघ का प्रयास है कि 2 लाख से अधिक स्थानों पर कम से कम एक सप्ताह के लिए संघ की शाखा लगे। इससे व्यक्ति संघ की शाखा में आकर स्वयं इसके महत्व को समझ पाएगा।

एकत्रीकरण में पटना महानगर के चार उपभाग के हजारों स्वयंसेवक उपस्थित थे। मंच पर दक्षिण बिहार प्रांत के संघचालक राजकुमार सिंहा तथा पटना महानगर के संघचालक डॉ राजीव कुमार, माननीय सह सरकार्यवाह जी के साथ उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

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