नागपुर में ‘भारतदुर्गा शक्ति स्थल’ का शिलान्यास, मोहन भागवत बोले— हर व्यक्ति बने ‘भारत’

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नागपुर में ‘भारतदुर्गा शक्ति स्थल’ का शिलान्यास, मोहन भागवत बोले— हर व्यक्ति बने ‘भारत’


नागपुर, 24 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा कि भारत माता की उपासना के लिए प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं ‘भारत’ बनना आवश्यक है। इसके लिए देश को जानकर उसे अपना मानना होगा।

नागपुर के जामठा स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट परिसर में श्री आबाजी थत्ते सेवा और अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रस्तावित ‘भारतदुर्गा शक्ति स्थल’ के शिलान्यास कार्यक्रम में देशभर के संत-महंत उपस्थित थे। इनमें श्री जूना अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज, चिन्मय मिशन के स्वामी मित्रानंद महाराज, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, साध्वी ऋतंभरा, पूर्व सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी के साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले आदि गणमान्य शामिल थे।

इस अवसर पर डॉ. भागवत ने अपने भाषण में कहा कि शक्ति के बिना कोई भी कार्य सिद्ध नहीं होता। सत्य को भी विश्व में स्थापित करने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है। भारत में सत्य के लिए शक्ति की आवश्यकता कम महसूस होती है, लेकिन अन्य देशों में ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ जैसी स्थिति दिखाई देती है। नागपुर में बनने वाला भारतदुर्गा मंदिर केवल एक स्थान न रहकर पूरे देश में पूजा-अर्चना की प्रेरणा देगा। उन्होंने आगे कहा कि डेढ़ सौ वर्षों की गुलामी के कारण भारतीयों के मन पर पाश्चात्य विचारों का प्रभाव पड़ा है। इसे दूर कर दैनिक जीवन से लेकर राष्ट्रीय विषयों तक ‘भारत’ बनने का प्रयास करना आवश्यक है। छोटे-छोटे कार्यों से इस प्रक्रिया की शुरुआत की जाए तो लक्ष्य निश्चित रूप से प्राप्त होगा, ऐसा विश्वास उन्होंने व्यक्त किया।

संघ प्रमुख ने कहा कि ‘भारत का पुनः वैभव अवश्य लौटेगा’

वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत ‘विश्वगुरु’ बनेगा या नहीं, इसको लेकर कई लोगों के मन में संशय है। राम मंदिर के निर्माण को लेकर भी पहले ऐसा ही संशय था, लेकिन दृढ़ विश्वास से वह साकार हुआ। उसी प्रकार यदि विश्व भारत के मार्ग को स्वीकार नहीं करता, तो उसके परिणाम उन्हें ही भुगतने होंगे। डॉ. भागवत ने कहा कि प्रत्येक भारतीय यदि ‘भारतदुर्गा’ की संकल्पना को अपने आचरण में उतारे, तो देश का पुनः वैभव अवश्य लौटेगा।

इस अवसर पर आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरी ने भारत को ‘जगदंबा का स्वरूप’ बताते हुए विश्वास जताया कि भारतदुर्गा मंदिर 52वां शक्तिपीठ बनेगा। साध्वी ऋतंभरा ने हिंदू समाज में विभाजन पर टिप्पणी करते हुए एकजुट होने का आह्वान किया। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भारतदुर्गा मंदिर देश को और अधिक शक्तिशाली बनाएगा। स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने कहा कि रामराज्य की स्थापना तक कार्य अधूरा है और समाज को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की आवश्यकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुलकर्णी

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