सामूहिक प्रयत्न से भारत बनेगा विश्वगुरु : जतिन कुमार

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सामूहिक प्रयत्न से भारत बनेगा विश्वगुरु : जतिन कुमार


नई दिल्ली, 24 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रान्त के पिछले 15 दिन से चल रहे संघ शिक्षा वर्ग - स्कूल विद्यार्थी का समापन समारोह बुधवार को पूर्ण प्रज्ञा पब्लिक स्कूल, वसंत कुंज, दिल्ली में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचारक जतिन कुमार जी मुख्य वक्ता तथा उड़ान की अध्यक्ष एवं निदेशक मधु सूरी जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रही।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचारक श्री जतिन कुमार जी ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने समाज जीवन के अनुभवों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला था कि भारत का पुनरुत्थान व्यक्ति निर्माण से ही संभव है। इसीलिए उन्होंने दैनिक शाखा के रूप में एक अभिनव पद्धति का विकास किया। जिसके द्वारा व्यक्ति को शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक तौर पर राष्ट्र सेवा के लिए तैयार किया जाता है। अब समाज की सज्जन शक्ति के सहयोग के द्वारा राष्ट्र के लिए उपयोगी समर्पित और संवेदनशील नागरिक तैयार करने की गति बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। इसमें सफल नागरिकों के द्वारा नागरिक कर्तव्य और शिष्टाचार को अपने जीवन में आत्मसात करने का समय आ गया है। हम सभी के मिलकर काम करने से ही देश आगे बढ़ेगा।

इस अवसर पर शिक्षार्थियों द्वारा साहस का निर्माण करने वाले भारतीय पारंपरिक खेलों, नियुद्ध, दंड-युद्ध, व्यायाम-योग, योगासन तथा घोष का सामूहिक प्रदर्शन किया गया।

कार्यक्रम को मुख्य अतिथि शेमरॉक जगत एवं मेक्सफोर्ट स्कूल की पूर्व प्रधानचर्या एवं निदेशक एवं ‘उड़ान’ की वर्तमान अध्यक्ष मधु सूरी ने भी संबोधित किया।

वक्ताओं ने उपस्थित विद्यार्थियों से कहा कि युवा ही देश का भविष्य है एवं इनके द्वारा ही देश एवं समाज का निर्माण व नेतृत्व होगा। सम्पूर्ण समाज को अपने जीवन में पंच परिवर्तन- सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली, नागरिक कर्तव्य पालन एवं स्वदेशी को अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत करना होगा।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रान्त संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल एवं इस संघ शिक्षा वर्ग के सर्वाधिकारी सुरेन्द्र राणा की भी उपस्थिति रही।

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने भारत को परम वैभव पर ले जाने के ध्येय से 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। इस ध्येय को प्राप्त करने की दृष्टि से सुयोग्य कार्यकर्ताओं के निर्माण हेतु ही संघ शिक्षा वर्गों का आयोजन किया जाता है।

15 दिन तक चले इस वर्ग में शिक्षार्थियों को विभिन्न प्रकार के औपचारिक प्रशिक्षण दिए गए। शारीरिक रूप से सुदृढ़ बनाने हेतु प्रतिदिन सुबह शाम शारीरिक प्रशिक्षण हुआ। मानसिक एवं वैचारिक स्पष्टता हेतु उन्हें बौद्धिक प्रशिक्षण दिया गया।

संघ शिक्षा वर्ग में कार्यकर्ताओं ने सामूहिक जीवन का प्रशिक्षण प्राप्त किया अर्थात सबके साथ समरस होकर सबको सहयोग करते हुए निश्चित व्यवस्था अनुसार अपने सभी काम पूर्ण करना। शिक्षार्थियों को पंच परिवर्तन के प्रशिक्षण के साथ ही उनमें संवेदनशीलता एवं सेवाभाव को और विकसित करने का प्रशिक्षण भी दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

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