विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस) ने अपना 44वां स्थापना दिवस मनाया

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विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस) ने अपना 44वां स्थापना दिवस मनाया


नई दिल्ली, 31 मई (हि.स.)। विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस) ने शनिवार को दिल्ली में अपना 44 वां स्थापना दिवस मनाया।

इस अवसर पर “कृषि परिवर्तन हेतु भारत-अफ्रीका साझेदारी को सुदृढ़ बनाना” विषय पर एक दिवसीय सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। यह सम्मेलन शनिवार को दक्षिण ग्लोबल: साउथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आरआईएस और आईसीआरआईसैट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

इस मौके पर विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न को रेखांकित करते हुए कहा, भारत की विकास यात्रा केवल देश तक सीमित नहीं है बल्कि यह विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के देशों सहित सम्पूर्ण विश्व की प्रगति से जुड़ी हुई है। उन्होंने साक्ष्य-आधारित नीति सुझावों और वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने में आरआईएस की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अपने शोध का दायरा बढ़ाने के लिए आरआईएस की प्रशंसा की।

वहीं, आरआईएस की शासी परिषद के सदस्य डॉ. शेषाद्रि चारी ने कहा कि समकालीन विकासात्मक चुनौतियों के समाधान और रणनीतिक नीति विमर्श को दिशा देने में संस्थान की प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है।

विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव (पीपी एंड आर) अपर्णा राय ने कहा कि समावेशिता, समानता और दक्षिण-दक्षिण सहयोग जैसी अवधारणाओं को वैश्विक नीति विमर्श में स्थापित करने में आरआईएस का योगदान उल्लेखनीय रहा है।

इससे पहले आरआईएस के महानिदेशक प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा ने 1983 में संस्थान की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा का ब्यौरा देते हुए कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और बहुपक्षीय संस्थाओं में बढ़ते विखंडन के इस दौर में आरआईएस की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। संस्थान वैश्विक दक्षिण की विकासात्मक आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सम्मेलन में सतत कृषि प्रणालियों, जलवायु-अनुकूल कृषि, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और कृषि-स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इसमें देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने अनुभवों का आदान-प्रदान किया, जिससे अफ्रीका और वैश्विक दक्षिण में प्रौद्योगिकी-संचालित कृषि विकास की नई राहें खुलीं।

इस समारोह में देश-विदेश के प्रमुख नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, विद्वानों और संस्थान के पूर्व सदस्यों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग और नीति अनुसंधान के क्षेत्र में आरआईएस के चार दशकों से अधिक के योगदान की सराहना की।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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