रीवा में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का काम रुका, सरपंच के नाम पर जारी कथित फर्जी एनओसी की जांच की मांग हुई तेज

WhatsApp Channel Join Now
रीवा में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का काम रुका, सरपंच के नाम पर जारी कथित फर्जी एनओसी की जांच की मांग हुई तेज


रीवा, 10 अक्टूबर (हि.स.)। जिले की सिरमौर तहसील के सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। शनिवार को परियोजना स्थल पर कंपनी, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई बैठक में सहमति नहीं बन सकी। बोरहोल का काम कराने पहुंची टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने काम रुकवाते हुए सरपंच के नाम पर जारी कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की जांच कराने और ग्रामसभा के प्रस्तावों के अनुरूप उनकी आपत्तियों का निराकरण करने की मांग उठाई।

परियोजना स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, कंपनी प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। सरई कला, रोझौही और आसपास के गांवों से पहुंचे लोगों ने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर पर परियोजना का विरोध हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों की आपत्तियों पर निर्णय लिए बिना आगे की प्रक्रिया बढ़ाने पर उन्होंने सवाल उठाए। अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर कायम रहे। विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका।

कथित फर्जी एनओसी पर सवाल, जांच की मांग

बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने सरपंच के नाम पर जारी कथित फर्जी एनओसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने पत्र क्रमांक 170/2026 की जांच कराकर दस्तावेज की वैधता स्पष्ट करने की मांग की। द्विवेदी के अनुसार, ग्रामसभा में 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे।

इस प्रकरण में ग्रामीणों का सवाल है कि जब ग्रामसभा में परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं, तब एनओसी जारी करने की प्रक्रिया और उसकी वैधता की जांच आवश्यक है। उन्होंने ग्रामसभा के प्रस्तावों, संबंधित दस्तावेजों और एनओसी की परिस्थितियों की पड़ताल कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की। एनओसी के कथित फर्जी होने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों ने कहा कि वे क्षेत्र में विकास, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर से जुड़े पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी संभावित जोखिमों पर उनकी चिंताओं का जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने परियोजना से संबंधित आशंकाओं का समाधान करने, स्थानीय लोगों की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करने और क्षेत्र में दूसरे उद्योग स्थापित करने के विकल्प पर भी विचार करने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि विकास की योजनाओं में स्थानीय आबादी की सहमति, सुरक्षा और हितों को महत्व मिलना चाहिए। परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलने तथा मांगों पर निर्णय होने तक वे आगे की गतिविधियों का विरोध जारी रखेंगे। वहीं, इस विरोध के दौरान सिरमौर तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के अधिकारी यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन और टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सरई कला की सरपंच कोमल सिंह, लालगांव उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी, सरपंच पति संजय सिंह और सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य लोग भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

ग्रामीणों के विरोध और मांगों पर सहमति नहीं बनने के कारण बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ पाया। बैठक में विवाद का कोई समाधान निकलने की जानकारी सामने नहीं आई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि एनओसी की जांच, ग्रामसभा के प्रस्तावों पर कार्रवाई और उनकी आपत्तियों का निराकरण होने तक विरोध जारी रहेगा। अब इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। एनओसी की जांच, ग्रामसभा के प्रस्तावों पर आधिकारिक स्थिति और परियोजना को लेकर ग्रामीणों की चिंताओं के समाधान पर ही आगे की प्रक्रिया की दिशा तय होगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

Share this story