गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की झांकी में दिखेगा देश का पहला आदिवासी डिजिटल संग्रहालय

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गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की झांकी में दिखेगा देश का पहला आदिवासी डिजिटल संग्रहालय


नई दिल्ली, 22 जनवरी (हि.स.)। इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी में देश के पहले डिजिटल संग्रहालय को दिखाया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को यहां आरआर कैंप में प्रेस प्रिव्यू के दौरान इस झांकी को प्रदर्शित किया। झांकी का विषय “स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम्” है। इसमें उन अमर आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि दी गई है, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के अन्यायपूर्ण कानूनों का विरोध किया और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए।

मंत्रालय ने बताया कि इस स्मृति को जीवित रखने के लिए नया रायपुर अटल नगर में देश का पहला आदिवासी डिजिटल संग्रहालय बनाया गया है। यहां 14 बड़े आदिवासी स्वतंत्रता संग्रामों को आधुनिक तकनीक से संरक्षित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे छत्तीसगढ़ राज्य के गठन की रजत जयंती पर उद्घाटित किया था।

मंत्रालय ने बताया कि झांकी को अंतिम रूप देने के लिए जनसंपर्क विभाग और कलाकारों ने पिछले एक महीने तक लगातार काम किया। इस साल कुल 17 राज्यों की झांकियों को परेड में शामिल होने का मौका मिला है।

झांकी के आगे के हिस्से में वीर गुंडाधुर को दिखाया गया है, जो 1910 के ऐतिहासिक भुमकाल विद्रोह के नायक थे। आम की टहनियां और सूखी मिर्चें, जो उस विद्रोह के प्रतीक थीं, झांकी में प्रमुखता से दिखाई गई हैं। विद्रोह इतना बड़ा था कि ब्रिटिश सरकार को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे गुंडाधुर को पकड़ नहीं पाए।

झांकी के पीछे के हिस्से में वीर नारायण सिंह को घोड़े पर तलवार लिए दिखाया गया। वह छत्तीसगढ़ के पहले शहीद माने जाते हैं। उन्होंने अकाल के समय गरीबों की भलाई के लिए संघर्ष किया तथा 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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