हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदू प्रवेश पर प्रतिबंध की फिर उठी आवाज, साधु संताें ने किया समर्थन

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हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदू प्रवेश पर प्रतिबंध की फिर उठी आवाज, साधु संताें ने किया समर्थन


हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदू प्रवेश पर प्रतिबंध की फिर उठी आवाज, साधु संताें ने किया समर्थन


हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदू प्रवेश पर प्रतिबंध की फिर उठी आवाज, साधु संताें ने किया समर्थन


पवित्र सनातन तीर्थ नगरी घोषित हो हरिद्वार : साध्वी प्राची

हरिद्वार, 06 जनवरी (हि.स.)। सप्तपुरियों में शामिल कुंभ नगरी हरिद्वार में गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर सौ साल पुराना प्रतिबंध एक बार फिर चर्चा में है। हरिद्वार के नगरपालिका बायलॉज में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि हर की पौड़ी सहित अन्य पावन घाटों पर गैर हिंदुओं का प्रवेश निषिद्ध बताया गया है। अब 2027 के अर्द्ध कुंभ मेले से पहले श्री गंगा सभा ने पूरे मेला क्षेत्र काे गैर हिन्दू के प्रवेश

पर प्रतिबंध लगाने की मांग का साध्वी प्राची सहित तमाम साधु संताें ने समर्थन किया है।

दरअसल, कुछ दिन पूर्व अगले साल यहां लगने वाले अर्द्ध कुंभ मेले की तैयारियों से पहले श्री गंगा सभा ने मांग उठाई है कि हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र में आने वाले सभी 105 घाटों पर बायलॉज के प्रावधानाें का लागू कर गैर हिन्दूओं के प्रवेश पर राेक लगाया जाए। उनकी

इस मांग का समर्थन संत समाज, अखाड़ा परिषद और पंडा समुदाय ने भी किया है।

इस संबंध में हिन्दुस्थान समाचार ने मंगलवार काे कई लाेगाें से बात की। श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने अपनी मांग

दाेहराते हुए फिर कहा कि गंगा के प्रति सनातनियों की आस्था और परंपरा की सुरक्षा के लिए गैर हिंदुओं का प्रवेश स्थायी रूप से प्रतिबंधित होना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की है कि हरिद्वार और ऋषिकेश को “पवित्र तीर्थ नगरी” घोषित किया जाए।

इस संबंध में अवधूत मंडल आश्रम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर रुपेंद्र प्रकाश महाराज ने कहा कि गंगा घाटों की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह प्रतिबंध केवल कुंभ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे स्थायी रूप से लागू किया जाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र से मांस और मदिरा की दुकानें बाहर की जानी चाहिए, ताकि सनातन आस्था की मर्यादा बनी रहे। निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि यदि कुंभ क्षेत्र को “पवित्र सनातन क्षेत्र” घोषित किया जाता है, तो इससे आस्था और भक्ति की भावना और प्रगाढ़ होगी। बड़ा अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि यह गंगा और सनातन परंपरा के प्रति आस्था का स्वागत योग्य कदम होगा।

इस संबंध में साध्वी प्राची ने भी कहा कि हरिद्वार और ऋषिकेश को सनातन की राजधानी माना जाता है, इसलिए इन पावन घाटों की परंपरा को उसी रूप में बनाए रखना आवश्यक है, जैसा कि सौ साल पहले निर्धारित किया गया था। उन्होंने कहा कि हरिद्वार और ऋषिकेश को पवित्र सनातन तीर्थ नगरी घोषित किया जाए।

हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही कह चुके हैं कि हरिद्वार और ऋषिकेश हमारी आस्था के प्रमुख गंगा तीर्थ स्थल हैं। राज्य सरकार इन स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए संकल्पित है और कुंभ से पहले गंगा घाटों के लिए एक बड़ी योजना पर काम किया जा रहा है। श्री गंगा सभा की मांग का अध्ययन किया जा रहा है और उस पर उचित निर्णय लिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश काल में वर्ष 1916 से यह नियम लागू है कि हरिद्वार में गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं का प्रवेश पर प्रतिबंधित है

और स्वतंत्रता के बाद 1953 में भी इसे यथावत रखा गया था। उस समय नियम तोड़ने पर दस रुपये के जुर्माना का प्रावधान किया गया था, जो आज भी बायलॉज में मौजूद है। इतने वर्षों से इस नियम के लागू रहने के बावजूद इसका कभी भी शत प्रतिशत पालन नहीं

किया गया। आएदिन कोई न कोई गैर हिंदू हर की पैड़ी इलाके में नजर आ ही जाता है। अब धार्मिक संगठनों ने इस संबंध में फिर उठाई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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