भारत की कृषि उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर मिलेगी पहचान : मांगी लाल जाट
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (हि.स.)। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने शुक्रवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परामर्श समूह (सीजीआईएआर)और आईसीएआर, नई दिल्ली में अगले वर्ष 12 से 17 अप्रैल तक 'सीजीआईएआर विज्ञान और साझेदारी सप्ताह' का आयोजन करेगा।
डीएआरई के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. जाट ने कहा कि इस आयोजन से भारत की कृषि उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी। इसमें दुनिया भर के कृषि विशेषज्ञ और वैज्ञानिक आदि भागीदारी करेंगे। डॉ. जॉट ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एनएएएस), राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी) में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि इस आयोजन के विस्तृत कार्यक्रम, प्रमुख सत्रों और वक्ताओं की सूची की घोषणा आने वाले महीनों में की जाएगी।
डॉ.जाट ने बताया कि भारत वर्ष 2027 में वैश्विक कृषि अनुसंधान और नवाचार के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी करेगा। अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान पर परामर्श समूह (सीजीआईएआर) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने घोषणा की है कि इस आयोजन का उद्देश्य कृषि विज्ञान, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से दुनिया की कृषि एवं खाद्य प्रणालियों को अधिक मजबूत, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाने के उपायों पर चर्चा करना है।
उन्होंने बताया कि इस छह दिवसीय आयोजन का संयुक्त संचालन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग की संस्था आईसीएआर और सीजीआईएआर द्वारा किया जाएगा। इसमें दुनिया भर के कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, किसान, नीति-निर्माता, सरकारों के प्रतिनिधि, स्टार्टअप, उद्योग जगत और विकास से जुड़े संगठन भाग लेंगे। सम्मेलन में उन कृषि नवाचारों पर विशेष चर्चा होगी, जो पहले से किसानों तक पहुंच रहे हैं और उन उपायों की पहचान की जाएगी, जिनसे इन तकनीकों एवं समाधानों का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जा सके।
डीएआरई के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक ने बताया कि भारत को इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए स्वाभाविक मेजबान माना जा रहा है। आईसीएआर दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणालियों में से एक का नेतृत्व करता है। भारतीय वैज्ञानिक पिछले पांच दशकों से भी अधिक समय से सीजीआईएआर के साथ मिलकर कृषि अनुसंधान और विकास के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। वर्तमान में सीजीआईएआरके दस अनुसंधान केंद्र भारत में फसल सुधार, जल प्रबंधन, पशुधन, मत्स्य पालन, पोषण और कृषि नीति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
भारत के कृषि अनुसंधान का प्रभाव देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। उदाहरण के तौर पर अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआईएसएटी) के संरक्षण और साझा किए गए मूंगफली के एक जर्मप्लाज्म नमूने ने ऐसी किस्मों के विकास में योगदान दिया, जिनकी खेती आज मलावी, युगांडा, मोजाम्बिक और जाम्बिया जैसे अफ्रीकी देशों में की जा रही है।
वहीं, हैदराबाद स्थित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर साउथ-साउथ कोऑपरेशन इन एग्रीकल्चर’ एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों के बीच उपयोगी कृषि तकनीकों, ज्ञान और सफल अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दे रहा है।
सीजीआईएआर 15 अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान केंद्रों की एक वैश्विक कृषि अनुसंधान साझेदारी है, जो 100 से अधिक देशों में काम कर रही है। इसने वैश्विक कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा, फसल सुधार और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारत के साथ इसकी साझेदारी ने विशेष रूप से आईसीएआर के माध्यम से फसल उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
हरित क्रांति के बाद भारत में हुए कृषि परिवर्तन का उल्लेख करते हुए डॉ. जाट ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मक्का और गेहूं सुधार केंद्र (सीआईएमएमवाईटी), अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) और आईसीआरआईएसएटी जैसे अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग ने देश की खाद्य उत्पादन क्षमता को मजबूत करने में अहम योगदान दिया। कभी खाद्यान्न की कमी और आयात पर निर्भर रहने वाला भारत आज दुनिया के प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है।
इस आयोजन में भारत की कृषि प्राथमिकताओं और सफल नवाचारों को ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के साथ साझा करने पर विशेष जोर रहेगा। डॉ. जाट ने कहा कि भारत की प्रमुख प्राथमिकता साउथ-साउथ सहयोग को मजबूत करना और अपनी सफल कृषि तकनीकों एवं अनुभवों को विशेष रूप से अफ्रीकी देशों तक पहुंचाना है।
उन्होंने जलवायु-अनुकूल कृषि, डिजिटल कृषि, एग्रीस्टैक, कृषि मशीनीकरण, मोटे अनाज (मिलेट्स), प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया। इन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी आदान-प्रदान की व्यापक संभावनाएं हैं।
सम्मेलन के दौरान कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला से जुड़ी कई उभरती चुनौतियों और प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श होगा। इनमें जलवायु परिवर्तन के प्रति कृषि की सहनशीलता, जल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, कृषि स्टार्टअप, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी तथा कृषि विज्ञान एवं नवाचारों को किसानों तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका प्रमुख रूप से शामिल हैं।
सीजीआईएआर की कार्यकारी प्रबंध निदेशक डॉ. इस्माहेन एलौफी ने कहा कि यह आयोजन भारत और सीजीआईएआर के बीच दशकों पुरानी साझेदारी की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ भविष्य के कृषि सहयोग के लिए एक दूरदर्शी एजेंडा तैयार करने का अवसर होगा।
उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को दिखाया है कि मजबूत राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान प्रणाली बड़े पैमाने पर किस तरह परिवर्तन ला सकती है। भारत से प्राप्त बीज, तकनीक और वैज्ञानिक ज्ञान पहले से ही अफ्रीका और एशिया के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। अप्रैल 2027 में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में इस सहयोग को और व्यापक बनाने तथा विज्ञान के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाशने पर चर्चा होगी।
डॉ. एलौफी ने मानव कल्याण में विज्ञान और वैज्ञानिकों के योगदान को पहचानने तथा खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने अप्रैल 2025 में केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित पहले सीजीआईएआर विज्ञान सप्ताह की सफलता का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि नई दिल्ली का आयोजन वैश्विक कृषि साझेदारियों को नई दिशा देगा और कृषि क्षेत्र की उभरती चुनौतियों के समाधान खोजने में मददगार साबित होगा।
आईसीआरआईएसएटीइ के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि खाद्यान्न की कमी से जूझने वाले देश से दुनिया के प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल होने तक भारत की कृषि यात्रा विज्ञान, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि ‘सीजीआईएआर विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह 2027’ के माध्यम से भारत की कृषि उपलब्धियों और नवाचारों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, दुनिया के विभिन्न देशों के अनुभवों से सीखकर कृषि एवं खाद्य प्रणालियों के सामने मौजूद नई चुनौतियों का सामूहिक समाधान तैयार करने का प्रयास होगा।
गौरतलब है कि पहला सीजीआईएआर विज्ञान सप्ताह अप्रैल 2025 में केन्या के नैरोबी में आयोजित किया गया था। उस आयोजन में सीजीआईएआर ने अपना मौजूदा अनुसंधान पोर्टफोलियो प्रस्तुत किया था। नई दिल्ली में आयोजित होने वाला दूसरा संस्करण केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस बात पर केंद्रित होगा कि अनुसंधान को वास्तविक प्रभाव में कैसे बदला जाए और साझेदारी के माध्यम से साउथ-साउथ सहयोग को किस तरह आगे बढ़ाया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामानुज शर्मा

