चुनौतियों का सामना करने के लिए बराबर तैयार रहें आर्मी कमांडर्स : राजनाथ
- रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना को बड़ा फ्रेमवर्क देने वाला 'लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन' लॉन्च किया
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (हि.स.)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि लंबे समय की रणनीतिक सोच के साथ काम करने और आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए बराबर तैयार रहने की जरूरत है। उन्होंने 'लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन' लॉन्च किया और यूनाइटेड नेशंस पीसकीपिंग मिशन में बेहतरीन सेवा के लिए तीन भारतीय सेना के जवानों को सम्मानित भी किया। रक्षा मंत्री ने मॉडर्न युद्ध के लिए एक इंटीग्रेटेड अप्रोच अपनाने की बात कही और जोर दिया कि सफलता मल्टी-डोमेन क्षमताओं और जॉइंट ऑपरेशन में आसान तालमेल पर निर्भर करेगी।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने नई सोच और बेहतर तालमेल दिखाया, साथ ही एडवांस्ड हथियारों का भी इस्तेमाल किया। रक्षा मंत्री ने आर्मी कमांडरों से जियोपॉलिटिकल और क्षेत्रीय डेवलपमेंट पर करीब से नजर रखने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा है। उन्होंने अगले 20-30 सालों के लिए एक लंबे समय के स्ट्रेटेजिक विज़न की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और भारतीय सेना के सीनियर लीडरशिप से तुरंत और नई चुनौतियों का जवाब देने के लिए समान रूप से तैयार रहने को कहा। उन्होंने कहा कि स्ट्रेटेजी डायनैमिक और फ्लेक्सिबल रहनी चाहिए, ताकि बदलते हालात के हिसाब से समय पर बदलाव किए जा सकें।
बदलते ऑपरेशनल हालात के हिसाब से खुद को ढालने के लिए डिफेंस फोर्स की तारीफ करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि नई सोच और बेहतर तालमेल के साथ-साथ एडवांस्ड हथियारों ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन से यह साफ संदेश गया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाने में नहीं हिचकिचाएगा। उन्होंने क्षमताओं को मजबूत करने, लगातार परफॉर्मेंस का आकलन करने और बदलते हालात के हिसाब से जरूरी सुधार लागू करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोनॉमस सिस्टम, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और सुरक्षित कम्युनिकेशन नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में कोशिशों में तेजी लाने के महत्व पर जोर दिया।
राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि हवा, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर डोमेन में चुनौतियों के बढ़ते महत्व के बावजूद जमीनी युद्ध और जमीनी सेनाएं जरूरी बनी रहेंगी। उन्होंने मॉडर्न युद्ध के लिए एक इंटीग्रेटेड अप्रोच की अपील की और ज़ोर दिया कि सफलता मल्टी-डोमेन क्षमताओं और जॉइंट ऑपरेशन में बिना रुकावट के तालमेल पर निर्भर करेगी। रक्षा मंत्री ने डिफेंस फोर्स की आत्मनिर्भरता की कोशिशों को माना और कहा कि भारत की बढ़ती डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं सभी स्टेकहोल्डर्स की मिलकर की गई कोशिशों का नतीजा हैं।
इस मौके पर रक्षा मंत्री ने लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन जारी किया, जो युद्ध के बदलते स्वरूप और भविष्य के संघर्षों से पैदा होने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय सेना को तैयार करने के लिए एक बड़ा फ्रेमवर्क देता है। उन्होंने सालाना यूनाइटेड नेशंस जर्नल का भी अनावरण किया और उन भारतीय सेना के जवानों को सम्मानित किया, जिन्होंने यूनाइटेड नेशंस पीसकीपर के तौर पर काम करते हुए खास योगदान दिया है और उनकी बेहतरीन सेवा, प्रोफेशनलिज्म और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में योगदान को मान्यता दी।
हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम

