राज्यसभा में पोस्टपार्टम डिप्रेशन सहित मॉल में कार्यरत महिलाओं की समस्याओं का उठा मुद्दा

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राज्यसभा में पोस्टपार्टम डिप्रेशन सहित मॉल में कार्यरत महिलाओं की समस्याओं का उठा मुद्दा


राज्यसभा में पोस्टपार्टम डिप्रेशन सहित मॉल में कार्यरत महिलाओं की समस्याओं का उठा मुद्दा


नई दिल्ली, 06 अगस्त (हि.स.)। राज्यसभा में गुरुवार को विशेष उल्लेख के दौरान प्रसव के बाद महिलाओं में होने वाले डिप्रेशन (पोस्टपार्टम डिप्रेशन) के साथ मॉल में काम करने वाली महिलाओं की समस्याओं का मुद्दा उठा। सांसदों ने सरकार से इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर योजना बनाने की मांग की गई।

राज्यसभा सांसद राजथी सलमा ने कहा गया कि बच्चे के जन्म के बाद कई महिलाओं को लगातार उदासी, भूख कम लगना और अपने बच्चे से जुड़ाव महसूस करने में परेशानी होती है। इसे पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता है। भारत में इस समस्या से जुड़े मामलों का कोई राष्ट्रीय रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए इसकी सही स्थिति का पता लगाना मुश्किल है।

यह भी कहा गया कि अगर समय पर इलाज न मिले, तो इसका असर मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इससे बच्चे को सही पोषण और स्तनपान नहीं मिल पाता और उसके मानसिक व भावनात्मक विकास पर भी असर पड़ सकता है।

उन्होंने सरकार से मांग की गई कि 'राष्ट्रीय मातृ मानसिक स्वास्थ्य रणनीति' शुरू की जाए। इसके तहत गर्भावस्था और प्रसव के बाद सभी महिलाओं की नियमित जांच की जाए, ताकि पोस्टपार्टम डिप्रेशन की समय रहते पहचान हो सके और उनका इलाज शुरू किया जा सके।

राज्यसभा सांसद सुलता देव ने विशेष उल्लेख के माध्यम से मॉल और बड़े वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत युवा महिला कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि इन प्रतिष्ठानों में काम करने वाली युवतियों को प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक लगातार खड़े होकर काम करना पड़ता है। अधिकांश स्थानों पर बैठने या विश्राम की उचित व्यवस्था नहीं होती, जिसके कारण कम उम्र में ही उन्हें कमर दर्द, पैरों में सूजन, अत्यधिक थकान और सर्वाइकल जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

सांसद ने यह भी कहा कि कई कार्यस्थलों पर स्वच्छ रेस्ट रूम, सुरक्षित विश्राम स्थल और नियमित ब्रेक जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उनके अनुसार, यह स्थिति महिला कर्मचारियों के स्वास्थ्य, गरिमा और सुरक्षित कार्यस्थल के अधिकार के विपरीत है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मॉल और रिटेल क्षेत्र में कार्यरत महिला कर्मचारियों के लिए अनिवार्य रूप से बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ रेस्ट रूम, सुरक्षित विश्राम स्थल, नियमित ब्रेक और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही इन प्रावधानों के प्रभावी पालन के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने की भी मांग की।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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