राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पेश

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राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पेश


नई दिल्ली, 25 मार्च (हि.स.)। राज्यसभा में बुधवार को केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 पेश किया। इस विधेयक को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष के सांसदों ने इसे गैर कानूनी और संविधान के खिलाफ बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे संविधान के अनुरूप बताया। इस विधेयक में आईपीएस अफसरों को पुलिस सशस्त्र बल में प्रतिनियुक्ति पर पोस्टिंग करने का रास्ता खोला जा रहा है, इसके अलावा अन्य मुद्दों पर विपक्ष विरोध कर रहा है।

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश, बंगाल के सांसद डेरेक ओब्राइन और केरल के एपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने चर्चा की मांग की। जयराम रमेश ने विधेयक पर चर्चा की मांग करते हुए कहा कि यह तय हुआ था कि विपक्ष के चार लोग बोलेंगे उसके बाद मंत्री जवाब देंगे, इसलिए पहले उन्हें बोलने दिया जाए। इसके बाद सभापति हरिवंश ने विपक्ष के चार सांसदों को बोलने की अनुमति दी। पश्चिम बंगाल के सांसद डेरेक ओब्राइन को जब बोलने का समय दिया गया, तो उन्होंने एक मिनट के समय को लेकर एतराज जताया और मौन रहने की बात कही। लेकिन जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो उन्होंने सदन से वॉकआउट कर दिया।

इसके बाद उपसभापति हरिवंश ने

कांग्रेस सांसद अजय माकन को मौका दिया। अजय माकन ने कहा कि यह विधेयक गैरकानूनी है। संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है, इसलिए हम इसका विरोध करते हैं। 2019 में जो नोटिफिकेशन हुआ है, उसके हिसाब से इस पर खर्च भी होगा, जबकि विधेयक में कहा गया है कि खर्च नहीं होगा। कोर्ट में छह फैसले आर्टिकल 14 और 16 के उल्लंघन पर आये हैं, लेकिन अब फिर यह विधेयक लाया जा रहा है। कांग्रेस सांसद विवेक तंखा ने कहा कि यह विधेयक संविधान के खिलाफ है। विधेयक में जो काडर प्रोटेक्शन दिया जा रहा है, वह संविधान के अधिकारों के खिलाफ है। संसद नियम बना सकती है, लेकिन संविधान के खिलाफ जाकर काम नहीं कर सकती।

विपक्ष की बातों पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह विधेयक संविधान के तहत ही आता है। संसद को किसी भी विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है, जो भारत की रक्षा और सशस्त्र बल से संबंधित है। सशस्त्र बलों के सारे नियम प्रावधान उनके मूल अधिकारों के तहत ही यथावत रहेंगे। संचित निधि के तहत अतिरिक्त पैसा भी नहीं लगेगा। उठाई गई कोई भी आपत्ति तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

केंद्रीय संसदीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत तरीके से रखता है, यह देश संविधान के हिसाब से ही चल रहा है। इस पर फिर हंगामा शुरू हो गया। इसके बाद सदन में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश कर उस पर चर्चा कराई गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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