विश्व में शांति का संदेश लेकर थाईलैंड से अयोध्या की पदयात्रा पर निकले राजू चान

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विश्व में शांति का संदेश लेकर थाईलैंड से अयोध्या की पदयात्रा पर निकले राजू चान


विश्व में शांति का संदेश लेकर थाईलैंड से अयोध्या की पदयात्रा पर निकले राजू चान


नई दिल्ली, 31 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया संकट के बीच शांति का संदेश लेकर राजू चान थाईलैंड के अयोध्या से लेकर अयोध्या नगरी के लिए पदयात्रा पर निकले हैं। चैत्र मास की रामनवमी के अवसर पर थाईलैंड के प्रसिद्ध वाट फनंगछन मंदिर से यह दिव्य यात्रा प्रारंभ की गयी। थाईलैंड की अयोध्या नगरी से डोनमुअंग (बैंकॉक) अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक पदयात्रा कर फ्लाइट से सोमवार को देर शाम दिल्ली पहुंचे। मंगलवार को उन्होंने महिपालपुर से अपनी पदयात्रा शुरू की है। वे दिल्ली से अयोध्या तक की 750 किलोमीटर की दूरी पैदल पूरा करेंगे। दिल्ली एयरपोर्ट से पैदल बदरपुर के रास्ते, मथुरा वृंदावन होते हुए वे अयोध्या पहुंचेंगे।

उद्देश्यपूर्ण यह पदयात्रा की दिल्ली से शुरूआत करते हुए राजू चान ने बताया कि पदयात्राएं दिलों को जोड़ती है। करीब 850 किलोमीटर की पैदल यात्रा का उद्देश्य विश्व में लोगों तक भगवान श्री राम के जीवन का संदेश पहुंचाना है। प्रभु राम का जीवन प्रेम, भाईचारे और नि:स्वार्थ सेवा का प्रतीक है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखते हुए बिना स्वार्थ के अपने कर्तव्यों को पूरा किया। उनके जीवन के इसी स्वाभाव को मन में लिए अयोध्या नगरी जाने की ठानी।

पैदल यात्रा के सवाल पर राजू चान कहते हैं कि उनके दादा ने पैदल ही थाईलैंड तक की यात्रा की थी और वहीं बस गए। वहीं अयोध्या नगरी बसा ली। श्री राम के संदेश को मन में बसाया। थाईलैंड ने उनके दादा को शरण दी और आज वहां तीन लाख से भी ज्यादा भारतीय हैं। उन्होंने कहा कि वे इस यात्रा के जरिए थाईलैंड के राजा का आभार व्यक्त करते हैं। राजू चान ने बताया कि उनके दादा थाईलैंड में बसे वहीं कारोबार किया। लेकिन भारत से अपना नाता नहीं तोड़ा। जड़ो से जुड़े रहे। अयोध्या नगरी ने दिल के तार हमेशा जोड़े रखा, इसलिए थाईलैंड में भी एक अयोध्या नगरी बसा ली।

उन्होंने बताया कि उनका

अंतिम पड़ाव प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि,

अयोध्या धाम के बाद वे अपने मूल गांव भी जाएंगे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद का पोखरी गांव है, जिसे लोग प्रेमपूर्वक मिनी थाई के नाम से भी जानते हैं। थाईलैंड में रहते जरुर हैं, आस्था अपनी जन्मभूमि और सनातन संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है।

उन्होंने बताया कि

यह यात्रा केवल धार्मिक नहीं बल्कि भारत और थाईलैंड के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को सुदृढ़ करने का एक सशक्त माध्यम भी है। इससे पहले भी वे कई पदयात्राएं कर चुके हैं। इससे पूर्व गोरखपुर के पोखरी (मिनी थाई) से प्रयागराज, काशी विश्वनाथ,

लखनऊ (मुख्यमंत्री आवास), गोरखनाथ एवं मुक्तिपथ तक सफल पदयात्राएं कर चुके हैं। इस पदयात्रा के दौरान हिन्दू स्वयंसेवक संघ थाईलैंड के प्रचारक उमेश मिश्रा जी एवं चन्द्रशेखर दुबे का भी मार्गदर्शन मिला है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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