रेलवे सुरक्षा के लिए खुफिया आधारित पुलिसिंग और एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (हि.स.)। रेलवे सुरक्षा को मजबूत करने के लिए खुफिया आधारित पुलिसिंग, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) तथा राज्य पुलिस के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है। जीआरपी प्रमुखों के आठवें अखिल भारतीय सम्मेलन में दीपावली और छठ के दौरान भीड़ प्रबंधन, ट्रेनों पर पत्थरबाजी की रोकथाम और यात्रियों की शिकायतों के त्वरित निपटारे सहित विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की गई।
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की ओर से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन शुक्रवार को नई दिल्ली में संपन्न हुआ। इसकी अध्यक्षता आरपीएफ की महानिदेशक सोनाली मिश्रा ने की। सम्मेलन में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार, रेलवे बोर्ड के सदस्य और विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के जीआरपी प्रमुख शामिल हुए।
सम्मेलन के दौरान जीआरपी कर्मियों को रेल मदद मंच से जोड़ने की पहल प्रमुख रही। रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (क्रिस) ने इस मंच पर जीआरपी कर्मियों को शामिल किया है। इसका उद्देश्य यात्रियों की शिकायतों का निपटारा तेज करना, सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान सुनिश्चित करना और शिकायतों की निगरानी को बेहतर बनाना है।
दक्षिण मध्य रेलवे ने अपने ‘पिंक पेट्रोल : आसमान में नजर, जमीन पर शक्ति’ मॉडल को प्रस्तुत किया। इस पहल के तहत ड्रोन से निगरानी और त्वरित कार्रवाई करने वाली टीमों को ‘शक्ति’ ढांचे के साथ जोड़ा गया है। सम्मेलन में इसे महिला नेतृत्व वाले सुरक्षा प्रयासों के उदाहरण के रूप में रेखांकित किया गया।
बैठक में ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं पर चिंता जताते हुए संवेदनशील स्थानों पर गश्त बढ़ाने, निगरानी मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही युवाओं के बीच जागरूकता अभियान चलाने तथा स्थानीय समुदायों को रोकथाम के प्रयासों में शामिल करने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।
त्योहारी सीजन में रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने दिल्ली पुलिस, जीआरपी और दिल्ली मेट्रो के साथ समन्वय से किए जा रहे प्रबंधों की जानकारी दी। इनमें सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली, बैरिकेडिंग, यात्रियों के लिए निर्धारित प्रतीक्षा क्षेत्र और नियंत्रण कक्ष शामिल हैं। सम्मेलन में अग्रिम योजना बनाने, यात्रियों की आवाजाही सुचारु रखने और सुरक्षा कर्मियों की समन्वित तैनाती पर जोर दिया गया।
मध्य रेलवे के पुणे मंडल ने ‘परियोजना दिशा’ के बारे में जानकारी दी। इस पहल के तहत रेलवे पटरियों के आसपास रहने वाले बच्चों को शैक्षिक और मनोरंजक गतिविधियों तथा सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से रेलवे सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है। गैर-सरकारी संगठनों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से बच्चों को पत्थरबाजी, चोरी, अनधिकृत रूप से पटरियां पार करने और अन्य असुरक्षित गतिविधियों से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
सम्मेलन में आरपीएफ और जीआरपी के संयुक्त प्रशिक्षण, रेलवे में तोड़फोड़ की रोकथाम तथा मादक पदार्थों की बरामदगी से संबंधित सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई। डिजिटल साक्ष्यों के प्रबंधन, जांच प्रक्रियाओं में एकरूपता, खुफिया सूचनाएं साझा करने और जांच क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता रेखांकित की गई।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार ने कहा कि रेलवे की बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए रेलवे प्रशासन, आरपीएफ, जीआरपी और राज्य पुलिस के बीच समन्वित प्रयास, तकनीकी प्रगति और नवाचार जरूरी हैं। उन्होंने यात्रियों का विश्वास बढ़ाने, पुलिसिंग को विनम्र और पेशेवर बनाने तथा प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से परिचालन दक्षता में सुधार करने पर भी जोर दिया।
सम्मेलन के समापन पर आरपीएफ महानिदेशक सोनाली मिश्रा ने रेलवे सुरक्षा मजबूत करने के लिए खुफिया आधारित पुलिसिंग अपनाने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

