प्रगति का बड़ा असर : दशकों से अटकी परियोजनाएं समय पर हुईं पूरी
नई दिल्ली, 02 जनवरी (हि.स.)। देश में बड़ी सार्वजनिक परियोजनाओं के समय पर पूरा न हो पाने, लागत बढ़ने और समन्वय की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए शुरू किया गया प्रगति आज सुशासन का एक प्रभावी और परिणामोन्मुख मॉडल बनकर उभरा है। प्रगति यानी प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइम्ली इम्पलिमेंटेशन।
अब तक प्रगति के तहत 50 से अधिक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों के माध्यम से 3,300 से अधिक परियोजनाओं और 61 प्रमुख सरकारी योजनाओं की निगरानी की गई है, जिनका कुल निवेश 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा, 36 से अधिक क्षेत्रों से जुड़ी नागरिक शिकायतों को भी इस मंच पर प्राथमिकता के साथ सुलझाया गया है। आंकड़े बताते हैं कि अब तक उठाए गए 7,735 मुद्दों में से 7,156 का समाधान किया जा चुका है, यानी लगभग 73 प्रतिशत सफलता दर हासिल हुई है।
दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रगति की 50वीं समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस उपलब्धि को चिन्हित करने के लिए कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने आज राष्ट्रीय मीडिया केन्द्र में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि पिछले दशक में पूंजीगत व्यय में भारी वृद्धि देखी गई है, जो 2014-15 में 4.26 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 15.53 लाख करोड़ रुपये हो गयी है। यह सरकारी और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का कुल योग है।
उन्होंने बताया कि प्रगति मंच ने रेलवे, सड़क और बिजली जैसे बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही देरी और समन्वय की समस्याओं को दूर करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। रेलवे क्षेत्र में प्रगति के तहत 427 परियोजनाओं की निगरानी की गई, जिनमें भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण स्वीकृति और निर्माण से जुड़े कुल 1,568 मुद्दे सामने आए। इनमें से 1,437 समस्याओं का समाधान कर परियोजनाओं को गति दी गई। जम्मू–उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक और बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल जैसी परियोजनाएं प्रगति हस्तक्षेप के बाद समयबद्ध रूप से पूरी हो सकीं, जिससे रणनीतिक और क्षेत्रीय संपर्क मजबूत हुआ।
सड़क क्षेत्र में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 1,463 परियोजनाएं प्रगति के दायरे में रहीं। इनमें 2,095 मुद्दों में से 1,968 का समाधान किया गया। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में तेजी आई, लॉजिस्टिक्स लागत घटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
बिजली क्षेत्र में भी प्रगति का प्रभाव स्पष्ट है। बिजली मंत्रालय की 416 परियोजनाओं से जुड़े 885 मुद्दों में से 803 का समाधान किया गया। इससे उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिली और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली। कुल मिलाकर, प्रगति ने इन तीनों क्षेत्रों में समयबद्ध क्रियान्वयन, बेहतर समन्वय और जवाबदेही को नई दिशा दी है।
प्रगति प्रभाव: समयबद्ध शासन का सशक्त मॉडल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना पर 25 मार्च 2015 को आरंभ यह डिजिटल प्लेटफॉर्म केंद्र–केंद्र, केंद्र–राज्य और राज्य स्तर पर विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजनाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन को गति देने में अहम भूमिका निभा रहा है।
प्रगति का मूल उद्देश्य उन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करना है, जो विभिन्न कारणों से लंबे समय से अटकी हुई थीं। इसके तहत परियोजना निगरानी, नागरिक शिकायत निवारण और योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा एक ही तकनीकी मंच पर की जाती है। इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्वयं प्रधानमंत्री राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र सरकार के सचिवों के साथ सीधे संवाद कर जमीनी अड़चनों का समाधान सुनिश्चित करते हैं।
प्रगति के प्रभाव को प्रमुख परियोजनाओं के उदाहरणों से स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है। जम्मू–उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक परियोजना, जिसे 1994 में स्वीकृति मिली थी, वर्षों तक धीमी गति से आगे बढ़ रही थी। प्रगति समीक्षा के बाद इस परियोजना की प्रगति में तेजी आई और अंततः जून 2025 में इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसी तरह, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना, जो 2007 से लंबित थी, प्रगति के हस्तक्षेप के बाद दिसंबर 2025 में परिचालन के लिए तैयार हो सकी। ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल भी प्रगति की सक्रिय निगरानी के चलते तय समय में पूरा हुआ।
प्रगति मंच पर सबसे अधिक जिन समस्याओं का समाधान हुआ है, उनमें भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण और वन स्वीकृति, मार्गाधिकार, निर्माण अनुमति, बिजली और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए बहु-स्तरीय फॉलो-अप तंत्र बनाया गया है, जिसमें कैबिनेट सचिवालय, संबंधित मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय लगातार निगरानी रखते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

