पीओजेके में जनता में बढ़ रहा असंतोष, नए विरोध प्रदर्शनों की आशंका

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नई दिल्ली, 29 जुलाई (हि.स.)। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) के रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती लगातार बढ़ाई जा रही है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन किसी भी नए प्रदर्शन या सार्वजनिक जमावड़े को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम कर रहा है। इसके बावजूद आने वाले दिनों में नए विरोध प्रदर्शन, बंद और सुरक्षा बलों के साथ टकराव की आशंका बनी हुई है।

सूत्रों का कहना है कि यह बहिष्कार राजनीतिक प्रक्रिया में जनता के घटते विश्वास और प्रशासन/व्यवस्था के प्रति निरंतर असंतोष का प्रमाण है। अधिकारी पीओजेके भर में संचार ब्लैकआउट और सेवाओं को निलंबित करना जारी रखे हुए हैं, जिससे नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का हनन हो रहा है और क्रूर दमन को जांच से बचाया जा रहा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रावलकोट से मुज़फ़्फ़राबाद तक संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के लंबे मार्च के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उन पर घातक बल का प्रयोग किया। खबरों के मुताबिक, इस कार्रवाई में 20 नागरिकों की मौत हो गई और 33 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हो गए। मृतकों में जेएएसी केंद्रीय समिति के सदस्य उमर नज़ीर के भाई उस्मान नज़ीर भी शामिल हैं।

जेएएसी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से गैरकानूनी हत्याओं की तत्काल स्वतंत्र जांच, घातक बल के प्रयोग को तुरंत रोकने, नागरिकों की सुरक्षा, घायलों को चिकित्सा सहायता और बल के किसी भी अत्यधिक या गैरकानूनी प्रयोग के लिए जवाबदेही तय करने की अपील की है।

स्वतंत्र रिपोर्टों के अनुसार मीरपुर डिवीजन में क्षेत्रीय चुनावों के पहले चरण में अनुमानित मतदान 10 प्रतिशत से कम रहा। यह आधिकारिक आंकड़ों (45 प्रतिशत) के बिल्कुल विपरीत है। जेएएसी के बहिष्कार के आह्वान के समर्थन में प्रमुख शहरों में पूर्ण बंद रहा।

जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय छात्र संघ (जेकेएनएसएफ) जैसे संगठनों ने इस दमन की खुले तौर पर निंदा की है। जेकेएनएसएफ ने छात्र संगठनों, ट्रेड यूनियनों, समाजवादी समूहों और मानवाधिकार संगठनों से पीओजेके के लोगों के साथ एकजुटता दिखाने का आग्रह किया है।

सुरक्षा बल रावलकोट, मुजफ्फरबाद और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की सभा को रोकने के लिए अपनी उपस्थिति बढ़ाए हुए हैं। हालांकि, आने वाले दिनों में अतिरिक्त विरोध प्रदर्शनों, बंद और टकराव की संभावना बनी हुई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

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