भारत-यूएई के बीच 7 विषयों पर सहमति, 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा
नई दिल्ली, 15 मई (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान 7 अहम विषयों पर सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच सामरिक रक्षा साझेदारी के ढांचे पर समझौता हुआ। ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तथा तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) आपूर्ति से जुड़े समझौतों पर सहमति बनी। गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा भारतीय अवसंरचना क्षेत्र, आरबीएल बैंक और सम्मान कैपिटल में 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की गई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और यूएई के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तथा अबूधाबी नेशनल ऑयल कंपनी से जुड़े समझौते का उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। इससे भारत को कच्चे तेल और एलपीजी की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी। यह समझौता भविष्य में वैश्विक संकट या तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान भारत को राहत देने में मदद करेगा।
एलपीजी आपूर्ति सहयोग समझौते के तहत यूएई भारत को दीर्घकालिक आधार पर तरलीकृत पेट्रोलियम गैस उपलब्ध कराएगा। इससे भारत की घरेलू गैस जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी। यह समझौता ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के साथ दोनों देशों की आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा।
भारत और यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी ढांचे का उद्देश्य रक्षा उद्योग सहयोग को बढ़ाना है। इसके तहत दोनों देश रक्षा तकनीक साझा करने और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और दोनों देशों के सामरिक संबंध मजबूत होंगे।
वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर स्थापित करने का समझौता भारत के समुद्री और औद्योगिक क्षेत्र को नई गति देगा। इससे जहाज मरम्मत उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती मिलेगी। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे।
जहाज निर्माण और मरम्मत क्षेत्र में कौशल विकास सहयोग का उद्देश्य भारतीय युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देना है। इससे भारत में शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयर क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार होंगे।
भारत में एआई सुपर कंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने के समझौते के तहत यूएई की तकनीकी कंपनी भारत में अत्याधुनिक डेटा सेंटर और सुपर कंप्यूटर क्षमता विकसित करेगी। इससे भारत के कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान और डिजिटल नवाचार मिशन को गति मिलेगी तथा तकनीकी क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।
यूएई के भारत में 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा भारतीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बड़ा समर्थन देगी। यह निवेश सड़क, बंदरगाह, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और भारत की विकास गति को मजबूती मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

