प्रधानमंत्री ने सुभाषितम् में मनुष्य को प्रेम, सौहार्द और सद्भाव कर्म करने पर जोर दिया
नई दिल्ली, 15 सितंबर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जैन धर्म के पवित्र पर्व संवत्सरी के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस मौके पर प्रेम, सौहार्द, करुणा और सद्भाव को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संस्कृत का एक श्लोक साझा करते हुए लिखा, “सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः। अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या॥” पीएम मोदी ने भावार्थ बताते हुए कहा कि मनुष्य को ऐसे कर्म करने चाहिए, जो हृदय में प्रेम, सौहार्द और सद्भाव को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को एक-दूसरे के प्रति उसी तरह स्नेह और आत्मीयता रखनी चाहिए, जैसे गाय अपने नवजात बछड़े के प्रति प्रेम रखती है।
प्रधानमंत्री ने संवत्सरी पर्व पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पवित्र अवसर हमें याद दिलाता है कि क्षमा और करुणा हर रिश्ते को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि संवत्सरी के अवसर पर विनम्रता लोगों का मार्गदर्शन करे और दया व सद्भावना हर कार्य का आधार बनें। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश का समापन जैन परंपरा के प्रसिद्ध क्षमायाचना वाक्य “मिच्छामि दुक्कड़म्” के साथ किया।
उल्लेखनीय है कि संवत्सरी जैन धर्म का एक प्रमुख और पवित्र पर्व है जो मुख्य रूप से क्षमा, आत्म-शुद्धि और प्रायश्चित के लिए मनाया जाता है। यह पर्युषण महापर्व का अंतिम दिन होता है।---------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

