प्रधानमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग के ध्यान मंदिर का किया उद्घाटन, आध्यात्मिकता, युवा शक्ति व पर्यावरण पर दिया जोर

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प्रधानमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग के ध्यान मंदिर का किया उद्घाटन, आध्यात्मिकता, युवा शक्ति व पर्यावरण पर दिया जोर


प्रधानमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग के ध्यान मंदिर का किया उद्घाटन, आध्यात्मिकता, युवा शक्ति व पर्यावरण पर दिया जोर


बेंगलुरु, 10 मई (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार काे बेंगलुरु में कनकपुरा रोड स्थित आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन आश्रम में नवनिर्मित ध्यान मंदिर का उद्घाटन किया करने के साथ ही विभिन्न उपक्रमों का शुभारंभ भी किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने आध्यात्मिकता, युवा शक्ति, पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी विकास और समाज की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहा कि समाज की शक्ति ही राष्ट्र निर्माण का वास्तविक आधार है। केवल सरकारें देश को नहीं बदल सकतीं। जब समाज सक्रिय रूप से भागीदारी करता है, तभी राष्ट्र नई ऊंचाइयों तक पहुंचता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की सुबह मेरे लिए एक अलग अनुभव लेकर आई है। बच्चों का वैदिक मंत्रों से स्वागत, गुरुदेव का आशीर्वाद और आर्ट ऑफ लिविंग की सेवा परंपरा, ये सभी क्षण मेरी स्मृतियों में हमेशा बने रहेंगे।

बेंगलुरु केवल तकनीक का शहर नहीं

बेंगलुरु की विशेषता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बेंगलुरु पूरी दुनिया में अपने सॉफ्टवेयर और सेवाओं के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यही शहर भारत की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय ही बेंगलुरु की सबसे बड़ी पहचान है। आर्ट ऑफ लिविंग की सेवा गतिविधियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “जब संकल्प स्पष्ट हो और कार्य सेवा भाव से किया जाए, तब हर प्रयास सकारात्मक परिणाम देता है।

समाज सरकार से अधिक शक्तिशाली

समाज की भूमिका पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं हमेशा मानता हूं कि समाज सरकारों से अधिक शक्तिशाली होता है। कोई भी अभियान तभी सफल हो सकता है, जब उसके पीछे समाज की शक्ति खड़ी हो। प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तेज़ बदलाव हो रहे हैं। भारत केवल इन परिवर्तनों का हिस्सा नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में नेतृत्व भी कर रहा है। उन्होंने कहा, “भारत की डिजिटल क्रांति ने देश को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक नेता बना दिया है। देश में अभूतपूर्व गति से बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है और भारत नवाचार के क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बन चुका है। युवा वैज्ञानिकों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हमारे युवा अपने उपग्रह अंतरिक्ष में भेज रहे हैं। इन उपलब्धियों के पीछे युवा शक्ति और जीवन जीने की कला की प्रेरणा है।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल

पर्यावरण और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों ने हमारी धरती और खेतों को नुकसान पहुंचाया है। धरती मां को रसायनों से बचाना भी जीवन जीने की कला है। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को और व्यापक बनाने का आह्वान किया तथा कहा कि पर्यावरण संरक्षण में समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को अलग नहीं किया जा सकता। पानी की हर बूंद बचाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि ‘पर ड्रॉप, मोर क्रॉप’ योजना के माध्यम से किसानों को जल के बेहतर उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

मिशन लाइफ जीवन का नया मार्ग प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला आंदोलन ही मिशन लाइफ है। यह जिम्मेदार और जागरूक जीवनशैली का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि मेरे दृष्टिकोण से मिशन लाइफ भी आर्ट ऑफ लिविंग का एक प्रत्यक्ष स्वरूप है।

कार्यक्रम में श्रीश्री रविशंकर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। बच्चों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया। श्री गणेश के दर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने ध्यान मंदिर का उद्घाटन किया और आश्रम के आध्यात्मिक वातावरण की सराहना की। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु, स्वयंसेवक और गणमान्य लोग शामिल हुए। ध्यान मंदिर के उद्घाटन के बाद आश्रम परिसर आध्यात्मिक उत्साह और ऊर्जा से भर उठा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश महादेवप्पा

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