लेह में पिपराहवा में बुद्ध के अवशेषों को 14 दिवसीय प्रदर्शनी के बाद भावपूर्ण विदाई दी गई

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लेह में पिपराहवा में बुद्ध के अवशेषों को 14 दिवसीय प्रदर्शनी के बाद भावपूर्ण विदाई दी गई


लेह, 15 मई (हि.स.)। लद्दाख में 14 दिवसीय भव्य प्रदर्शनी के समापन के बाद शुक्रवार को लेह हवाई अड्डे पर भगवान बुद्ध के पवित्र पिपराहवा अवशेषों को भावनात्मक विदाई दी गई। इस दौरान 1 लाख 18 हजार से अधिक भक्तों ने पवित्र अवशेषों को नमन किया। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना विदाई समारोह में शामिल हुए।

उपराज्यपाल ने कहा कि पवित्र दिनों ने लद्दाख को प्रार्थना, करुणा और आध्यात्मिक जागृति की भूमि में बदल दिया। उन्होंने कहा कि मठों से लेकर दूरदराज के गांवों तक और पहाड़ी इलाकों से लेकर भीड़भाड़ वाले बाजारों तक पूरा लद्दाख भक्ति, शांति और श्रद्धा से गूंज रहा था। सक्सेना ने आशा व्यक्त की कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं सीमाओं और मतभेदों से परे मानवता को एकजुट करना जारी रखेंगी और दुनिया भर में शांति, करुणा, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देंगी। उन्होंने कहा कि मैं इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं जिनके समर्पण और अथक प्रयासों ने इसे एक बड़ी सफलता दिलाई।

प्रदर्शनी का समापन गुरुवार को चोगलामसर के धर्म केंद्र में अवशेषों को अंतिम सम्मान देने के लिए हजारों भक्तों के इकट्ठा होने के साथ हुआ। अप्रेल 29 काे लेह में पवित्र अवशेषों के आगमन ने एक भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा की थी जिसमें हजारों निवासी पारंपरिक पोशाक पहने हुए अवशेषों का स्वागत करने के लिए लेह हवाई अड्डे से जिवेतसल तक की सड़कों पर कतार में खड़े थे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लेह के जिवेतसल में 2569वीं बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए अवशेषों का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया था। शाह ने उद्घाटन समारोह के दौरान लद्दाख में दो दिन बिताए थे। प्रदर्शनी में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू, श्रीलंका और थाईलैंड के राजदूत, संसद सदस्य, वरिष्ठ बौद्ध नेता, भिक्षु, विद्वान और अंतर्राष्ट्रीय तीर्थयात्रियों सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

प्रदर्शनी के दौरान विशेष प्रार्थना, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सम्मेलन और आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। समापन समारोह पवित्र मोनलाम चेन्मो के साथ हुआ जो विश्व शांति और सार्वभौमिक खुशी को समर्पित लद्दाख का वार्षिक महान प्रार्थना उत्सव है। इसमें हजारों भिक्षुओं, ननों, आदरणीय रिनपोचों और भक्तों ने उत्सव में भाग लिया, जबकि इस अवसर पर भिक्षुओं ने पवित्र मुखौटा नृत्य पेश किया, जिसे छम्स के नाम से जाना जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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