मप्र में पांच हजार पेसा मोबिलाइजर्स को बड़ा झटका, सरकार ने की सेवाएं समाप्त
भोपाल, 18 मई (हि.स.) । मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के रिक्त पदों को डाइंग कैडर घोषित किए जाने के ठीक एक सप्ताह बाद राज्य सरकार ने प्रदेशभर के जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत करीब 5 हजार पेसा मोबिलाइजर्स को एक बड़ा झटका दिया है। पंचायत राज संचालनालय ने तत्काल प्रभाव से इन सभी मोबिलाइजर्स की सेवाएं समाप्त करने का सोमवार को आदेश जारी कर दिया।
इस आदेश के अनुसार प्रदेश के सभी संबंधित जिलों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के आदिवासी अंचलों की 5,254 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने और सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से इन मोबिलाइजर्स की नियुक्तियां की गई थीं, जिनकी सेवाएं अब पूरी तरह खत्म कर दी गई हैं।
संचालनालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार पेसा मोबिलाइजर्स की यह व्यवस्था भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए संशोधित) योजना के तहत संचालित की जा रही थीं। इस योजना की अवधि 01 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2026 तक ही निर्धारित थी और इसी के बजट मद से इन मोबिलाइजर्स को मासिक मानदेय का भुगतान किया जाता था। चूंकि 31 मार्च 2026 को इस योजना की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है और इसके नए स्वरूप को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर नीति निर्माण की प्रक्रिया फिलहाल विचाराधीन है, ऐसे में ग्राम पंचायतों के माध्यम से चयनित इन ग्राम सभा मोबिलाइजर्स की सेवाएं आगे जारी रखना संभव नहीं रह गया है। इसलिए विभाग ने सभी संबंधित ग्राम पंचायतों को इन्हें तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त करने को कहा है।
सरकार के इस फैसले से मुख्य रूप से झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, मंडला, डिंडोरी, अनूपपुर, धार, खरगोन, रतलाम, खंडवा, बुरहानपुर, नर्मदापुरम, बैतूल, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सीधी, शहडोल, उमरिया और श्योपुर सहित पेसा एक्ट के दायरे में आने वाले 20 जिलों के कर्मचारी प्रभावित होंगे।
गौरतलब है कि इन पेसा मोबिलाइजर्स को सेवामुक्ति से पहले मानदेय वृद्धि के मोर्चे पर भी झटका लगा था। अक्टूबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ी घोषणा की थी कि जनजातीय क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाने वाले करीब 4,665 पेसा मोबिलाइजर्स का मानदेय 4 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 8 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। हालांकि, केंद्र सरकार से समय पर अतिरिक्त फंड न मिलने के कारण सरकार की यह घोषणा कागजों से बाहर नहीं आ सकी और अब सीधे सेवा समाप्ति का आदेश आ गया।
मध्य प्रदेश में पेसा एक्ट का क्रियान्वयन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में 15 नवंबर 2022 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी में शहडोल से शुरू किया गया था। इसके तहत 20 जिलों के 89 विकासखंडों की 5,254 पंचायतों और 11,757 गांवों में आदिवासी समाज को जल, जंगल और जमीन से जुड़े विशेष अधिकार दिए गए थे। इन क्षेत्रों में पेसा मोबिलाइजर्स ही ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, ग्राम सभाओं के आयोजन में सहयोग करने, स्थानीय विवादों को सुलझाने और सरकारी संदेशों को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने की मुख्य कड़ी के रूप में काम कर रहे थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

