संसद के दोनों सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

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संसद के दोनों सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित


- 18वीं लोक सभा का सातवां सत्र सम्पन्न, कार्य-उत्पादकता रही 93 प्रतिशतनई दिल्ली, 18 अप्रैल (हि.स.)। संसद का बजट सत्र शनिवार को दोनों सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगन के साथ समाप्त हो गया। यह सत्र राजनीतिक रूप से काफी उथल-पुथल भरा रहा और इसे विशेष बैठकों के लिए निर्धारित समय से आगे बढ़ाया गया था, जिसमें चुनावी सुधारों पर चर्चा की गई।

सत्र के दौरान सरकार द्वारा प्रस्तुत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, जो महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और परिसीमन प्रक्रिया लागू करने से संबंधित था, लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि पारित होने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने समापन संबोधन में बताया कि सदन की कार्य-उत्पादकता लगभग 93 प्रतिशत रही और कुल 41 बैठकें आयोजित की गईं। इस दौरान 12 सरकारी विधेयक पेश किए गए, जिनमें से 9 पारित हुए। इनमें वित्त विधेयक 2026 सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं।

राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि उच्च सदन ने कुल 157 घंटे से अधिक कार्य किया और इसकी उत्पादकता लगभग 110 प्रतिशत रही। उन्होंने सदस्यों के योगदान की सराहना की और बताया कि यह सत्र देश की विकास दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहा।

विशेष बैठकों के दौरान सरकार ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने, निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करने और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, विपक्ष ने इन प्रस्तावों का कड़ा विरोध किया और आरोप लगाया कि इससे कुछ राज्यों के प्रभाव को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

विधेयक के विफल होने के बाद सरकार ने परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी वापस ले लिया। सत्र के दौरान कई बार हंगामा और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई।

हालांकि, इस राजनीतिक गतिरोध के बीच 2026-27 का केंद्रीय बजट पारित कर लिया गया। संसद के स्थगन के साथ महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे फिलहाल अधर में लटक गए हैं, जिन पर भविष्य में फिर से चर्चा होने की संभावना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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