‘जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक को मिली संसद की मंजूरी

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‘जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक को मिली संसद की मंजूरी


नई दिल्ली, 02 अप्रैल (हि.स)। सरकार के 23 विभागों से संबधित 79 कानूनों के पौने आठ सौ से अधिक प्रावधानों को नरम बनाने वाले ‘जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026 को संसद की मंजूरी आज मिल गई।

राज्यसभा ने गुरुवार को जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। लोकसभा ने जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 एक दिन पहले पारित कर दिया था। इसके साथ ही राज्यसभा की कार्यवाही 16 अप्रैल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया। इसके बाद 'जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026' को राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इससे पहले सदन ने कांग्रेस सदस्य के. काव्या द्वारा पेश किए गए संशोधनों को ध्वनि मत से खारिज कर दिया।

पीयूष गोयल ने कहा यह विधेयक नागरिकों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों एमएसएमई के लिए मददगार साबित होगा। गोयल ने कहा कि इससे लोगों को मदद मिलेगी। उन्होंने सदन को बताया कि इसका उद्देश्य 1,000 से ज्यादा अपराधों को तर्कसंगत बनाना भी है, जिसमें पुराने और बेकार प्रावधानों को हटाया जाएगा, जिससे कुल मिलाकर रेगुलेटरी माहौल बेहतर होगा।

पीयूष गोयल ने कहा कि जन विश्वास विधेयक में रामराज्य की झलक दिखती है। उन्होंने विपक्ष द्वारा इस विधेयक में किसानों के अहित का आरोप लगा कर विरोध किये जाने की आलोचना करते हुए कहा, ऐसा लगता है कि यह एक आदत बन गई है। पिछले कई महीनों से हमने देखा है कि विभिन्न मुद्दों पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है, चाहे वह अमेरिकी व्यापार समझौता हो, आरक्षण हो या किसानों को गुमराह करने का प्रयास हो। हमारे किसान देश के अन्नदाता बनकर मेहनत करते हैं, देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, फिर भी उनका बार-बार गुमराह किया जाता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोगों को भ्रमित करने के लिए इस तरह की सोची-समझी रणनीति का इस्तेमाल किया जा रहा है। हमने जो बदलाव किया है, वह पशुपालन कानून से संबंधित है, जो 1871 का है, जो लगभग 150 साल पुराना है। यह आश्चर्य की बात है कि इस तरह का पुराना कानून आज भी देश में लागू था।

विधेयक की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि मौजूदा प्रावधान के अनुसार, अगर किसी अधिकारी को उसके कर्त्तव्य पालन में बाधित किया जाता है, तो सजा पहले एक साल की कैद थी। हमने इसे घटाकर केवल छह महीने कर दिया है। हमारा मानना है कि आपदा के दौरान कोई भी जानबूझकर किसी अधिकारी को बाधित नहीं करता है। कभी-कभी, यदि कोई अधिकारी आपदा के दौरान सहायता प्रदान करने के लिए किसी के घर में प्रवेश करता है और कोई व्यक्ति, भ्रम या गलतफहमी के कारण, उन्हें रोकता है, तो ऐसे मामलों में सजा की कठोरता कम की गई है ताकि व्यक्तियों के लिए कठिनाई कम हो सके। हालांकि, अगर इस तरह की बाधा से जीवन का नुकसान होता है, तो सजा को कम नहीं किया गया है और अपरिवर्तित रहता है। इसी तरह, हितधारकों से परामर्श करने के बाद, हम विभिन्न कानूनों को सरल बनाने की दिशा में आगे बढ़े हैं।

उन्होंने कहा, कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया है कि कृषि कानूनों को कमजोर किया गया है, जिनमें कृषि क्षेत्र से संबंधित कानून भी शामिल हैं। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि इस कानून के अंतर्गत बीज अधिनियम, उर्वरक अधिनियम या आवश्यक वस्तु अधिनियम जैसे कोई भी कानून शामिल या संशोधित नहीं किए गए हैं। इसलिए इस तरह से लोगों को गुमराह करने की कोशिशों से बचना चाहिए।

पीयूष गोयल ने विधेयक पारित करने के लिए सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, मैं उन सभी सदस्यों को धन्यवाद देना चाहता हूं, जो आज घर लौटने की जल्दी में होने के बावजूद, इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा करने के लिए वापस रुके ... हनुमान जयंती के इस पावन अवसर पर जब हम इस विधेयक को पारित कर रहे हैं, तो स्वाभाविक है कि हमें भगवान राम की याद आ जाए। आपके फैसले के अनुसार, मैं इस विषय पर रहूंगा और राम मंदिर के बारे में नहीं बोलूंगा, लेकिन मैं याद करना चाहूंगा कि भगवान राम ने हनुमान जी में कैसे विश्वास किया था। वह विश्वास इतना मजबूत था कि असंभव भी संभव हो गया, चाहे वह समुद्र पार करना हो या पहाड़ उठाना हो... एक सच्चे सैनिक की तरह, हनुमान जी ने भगवान राम द्वारा उन पर रखे गए विश्वास से प्रेरित होकर, पूरे समर्पण के साथ हर कार्य को पूरा किया। इसी तरह हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भारत के लोगों पर गहरी आस्था है, जैसे भगवान राम को हनुमान जी पर थी।

संसद द्वारा पारित जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 देश के कारोबारी माहौल को और बेहतर बनाने के लिए 23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन करेगा, ताकि छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा सके और उन्हें तर्कसंगत बनाया जा सके। इसका उद्देश्य 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और 67 प्रावधानों में संशोधन करना है, ताकि जीवन को सुगम बनाया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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