संसद में राहुल गांधी के व्यवहार पर नागरिक समूह ने जताई चिंता
नई दिल्ली, 17 मार्च (हि.स.)। लोकतांत्रिक ढांचे का सर्वोच्च स्तंभ संसद में सदस्यों के आचरण और संस्थागत सम्मान को लेकर बहस तेज हो गई है। हाल ही में संसद परिसर के भीतर हुई कुछ घटनाओं को लेकर प्रमुख पूर्व सैनिकों, पूर्व नौकरशाहों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने नागरिकों को पत्र लिखकर इस व्यवहार पर चिंता व्यक्त की है। इसमें विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में किए गए कार्यों को संसदीय मर्यादा के प्रतिकूल बताया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संसद हमारे संवैधानिक ढांचे में एक अनोखा और ऊंचा स्थान रखती है। यह लोकतांत्रिक चर्चा का सर्वोच्च मंच है जहां लोगों की सामूहिक इच्छा व्यक्त होती है कानून बनते हैं और गणतंत्र की नींव को लगातार मजबूत किया जाता है। इसलिए संसद की गरिमा केवल एक परंपरा का विषय नहीं है बल्कि यह उस संवैधानिक भावना का एक जरूरी हिस्सा है जो हमारे लोकतंत्र को चलाती है।
संसद भवन की सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी केवल भौतिक स्थान नहीं हैं बल्कि वे इस पवित्र संस्था का अभिन्न अंग हैं। 12 मार्च को संसद परिसर के भीतर विरोध-प्रदर्शनों पर रोक लगाने के अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विपक्ष की ओर से उनकी अनदेखी की गई। जानकारों के अनुसार अध्यक्ष के निर्देशों की जान-बूझकर अवहेलना करना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह संसदीय सत्ता के प्रति उपेक्षा को भी दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार राहुल गांधी और अन्य सदस्यों को संसद की सीढ़ियों पर चाय-बिस्किट करते हुए देखा गया। इस व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा गया है कि संसद की सीढ़ियां राजनीतिक नाटक या व्यक्तिगत प्रदर्शन का स्थान नहीं हैं। इस तरह का आचरण व्यवहार और शिष्टाचार के स्थापित मानदंडों की स्पष्ट अवहेलना है जो भारत के लोगों की लोकतांत्रिक इच्छा के प्रतीक के प्रति सम्मान की कमी को उजागर करता है।
विभिन्न वर्गों की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि संसद को 'लोकतंत्र का मंदिर' माना जाता है, जहां राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष के नेता जैसे जिम्मेदार पद पर आसीन व्यक्ति की ओर से बार-बार किया जाने वाला ऐसा व्यवहार सार्वजनिक चर्चा और शिष्टाचार के स्तर को गिराता है। इससे न केवल जनता के कीमती समय और संसाधनों की बर्बादी होती है बल्कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचती है।
संस्थागत पवित्रता को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि संसद सदस्य मर्यादा और संयम का पालन करें। नागरिकों के एक समूह ने राहुल गांधी से उनके इस व्यवहार के लिए राष्ट्र से माफी मांगने और अपनी कार्यशैली पर आत्मचिंतन करने का आग्रह किया है। यह मांग की गई है कि भविष्य में संसद की गंभीरता और अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए व्यक्तिगत विशेषाधिकार की भावना से ऊपर उठकर संस्थागत सम्मान को प्राथमिकता दी जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

