ओडिशा के युवक के अंगदान से चार को मिलेगा नया जीवन, वंदे भारत से पहली बार पहुंचा लाइव हार्ट

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ओडिशा के युवक के अंगदान से चार को मिलेगा नया जीवन, वंदे भारत से पहली बार पहुंचा लाइव हार्ट


सूरत, 31 जुलाई (हि.स.)। ओडिशा के युवक के अंगदान से चार को जीवन मिलेगा। ओडिशा निवासी मिथुन सूरत के किम स्थित पीपोदरा में एक कपड़ा कारखाने में कार्यरत था। मिथुन के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनके परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया।उनके हृदय, दोनों किडनी और लीवर के दान से चार मरीजों को नया जीवन मिलेगा।

भारतीय रेलवे ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से जीवित मानव हृदय (लाइव हार्ट) का सफल परिवहन किया है। सूरत से अहमदाबाद तक मात्र 217 मिनट में मिथुन के हृदय को सुरक्षित पहुंचाया गया, जिससे हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए समय पर अस्पताल तक पहुंचाने की बड़ी चुनौती सफलतापूर्वक पूरी की गई।

मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 20901) के जरिए लाइव हार्ट को अहमदाबाद पहुंचाया गया। हृदय को सुबह 9:18 बजे सूरत से रवाना किया गया और 12:55 बजे अहमदाबाद स्थित यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर पहुंचा दिया गया। अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 से अस्पताल तक विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया, जिससे बिना किसी विलंब के हृदय अस्पताल पहुंच सका।

दक्षिण गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण हवाई सेवाएं प्रभावित थीं। ऐसे में इस जीवनरक्षक मिशन के लिए रेलवे का सहारा लिया गया। भारतीय रेलवे के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब किसी मानव अंग का परिवहन ट्रेन के माध्यम से किया गया। इससे पहले किसी भी मानव अंग को रेलवे के जरिए नहीं ले जाया गया था।

बीती 28 जुलाई को मिथुन अपने कमरे पर भोजन कर रहे थे, तभी अचानक उनका मुंह टेढ़ा हो गया और शरीर के बाएं हिस्से का हाथ-पैर काम करना बंद कर दिया। उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए 108 एंबुलेंस के जरिए सूरत सिविल अस्पताल रेफर किया गया। सिविल अस्पताल के आपातकालीन विभाग में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया।

30 जुलाई को शाम करीब 4 बजे आरएमओ डॉ. केतन नायक, प्लास्टिक सर्जन डॉ. निलेश काछड़िया, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रयाग मकवाणा तथा न्यूरोसर्जन डॉ. केयूर प्रजापति की मेडिकल टीम ने मिथुन को ब्रेन डेड घोषित किया। इसके बाद अंगदान चैरिटेबल ट्रस्ट के स्वयंसेवक इकबाल कड़ीवाला और काउंसलर निर्मला काथुडे ने मिथुन की पत्नी, भाई और अन्य परिजनों को अंगदान के महत्व के बारे में समझाया। दूसरों को नया जीवन देने की भावना से परिवार ने भारी मन से अंगदान के लिए सहमति प्रदान की।

भारतीय रेलवे, गुजरात पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), चिकित्सकों की टीम, अंग प्रत्यारोपण समन्वयकों तथा विभिन्न एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से यह मिशन सफल हुआ। यह उपलब्धि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में भारतीय रेलवे की महत्वपूर्ण भूमिका और त्वरित समन्वय क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण बन गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

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