छत्तीसगढ़ के बस्तर में केवल एक नक्सली कमांडर पापा राव ही बचा

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में केवल एक नक्सली कमांडर पापा राव ही बचा


भाजपा शासित राज्यों और बस्तर सहित समूचे छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण करने से बच रहे नक्सली कैडर

जगदलपुर, 05 जनवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर तेलंगाना तक दशकों से विस्तारित लाल आतंक के माओवादी नेटवर्क अब अंतिम

सांसें ले रहा है। सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, निरंतर दबाव और माओवादी नेतृत्व के विघटन ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है।

शनिवार को तेलंगाना में पीएलजीए (पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन नंबर–एक के प्रमुख बारसे देवा उर्फ सुक्का के आत्मसमर्पण और सुकमा में कोंटा एरिया कमेटी प्रमुख हुंगा मड़कम ऊर्फ पंचुगा एवं आयती मुचाकी ऊर्फ जोगी के मारे जाने के बाद बस्तर में नक्सली संगठन पूरी तरह से नेतृत्वविहीन हो गया है। बस्तर में अब केवल एक नक्सली कमांडर पापा राव शीर्ष स्तर पर बचा है, जबकि जमीनी स्तर पर गिनती के ही माओवादी सक्रिय हैं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों काे विश्वास है कि जल्द ही बस्तर काे नक्सलमुक्त हाेने की घोषणा कर दी जाए।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. का कहना है कि माओवादी संगठन का संख्या बल लगातार घट रहा है और नेतृत्व पूरी तरह बिखर चुका है। बस्तर में अब केवल पापा राव शीर्ष स्तर पर बचा है, जबकि जमीनी स्तर पर गिनती के ही माओवादी सक्रिय हैं। यदि बचे हुए माओवादी समय रहते आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो भविष्य में उनके लिए यह विकल्प भी नहीं बचेगा।

गाैरतलब है कि बस्तर मूल के नक्सली कमांडर रहे बारसे देवा ने शनिवार को हैदाराबाद के डीजीपी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। उसके आत्मसमर्पण के बाद अब कई तरह की चर्चाएं तेज हैं, इन्हीं चर्चाओं के बीच इस बात को भी बल मिल रहा है कि बस्तर समेत समूचे छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण करने से बड़े नक्सल कैडर बच रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं उनका यहां एनकाउंटर ना कर दिया। जाए। पिछले साल जगदलपुर में सीसी मेंबर रूपेश ने आत्मसमर्पण किया था, इसके अलावा सभी बड़े चेहरों ने छत्तीसगढ़ से बाहर ही आत्मसमर्पण किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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