'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' का योगी मॉडल 'मोदी विजन' से देश के 773 जिलों में पहुंचा

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'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' का योगी मॉडल 'मोदी विजन' से देश के 773 जिलों में पहुंचा


- 1,244 उत्पाद बने भारत की नई आर्थिक ताकत

डॉ. मयंक चतुर्वेदी

नई दिल्ली, 11 अगस्त (हि.स.)। संसद में जब केंद्र सरकार ने बताया कि 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) के तहत देश के 773 जिलों में 1,244 विशिष्ट उत्पादों की पहचान की जा चुकी है, तो यह जानकारी उस आर्थिक परिवर्तन की आधिकारिक पुष्टि रही, जिसकी शुरुआत छह वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के प्रत्येक जिले की पारंपरिक पहचान को आर्थिक शक्ति में बदलने के संकल्प के साथ की।

उस समय शायद ही किसी ने अनुमान लगाया हो कि यूपी का यह प्रयोग कुछ ही वर्षों में भारत सरकार की आर्थिक नीति का अभिन्न हिस्सा बन जाएगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत', 'वोकल फॉर लोकल' तथा 'लोकल टू ग्लोबल' जैसे राष्ट्रीय अभियानों को मजबूत आधार देगा। आज यह योजना स्थानीय उत्पादन, रोजगार, निर्यात, कौशल विकास, ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार तक पहुंच का ऐसा व्यापक आर्थिक मॉडल बन चुकी है, जिसे भारत की नई विकास योजना के रूप में देखा जा रहा है।

योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2018 में प्रदेश में 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' योजना की शुरुआत की थी। तब उन्होंने कहा था, यदि प्रत्येक जिले की पारंपरिक विशेषज्ञता को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ा जाए, तो वही स्थानीय उत्पाद राज्य और देश की आर्थिक प्रगति के इंजन बन सकते हैं। इस योजना ने शुरुआती वर्षों में ही परिणाम देना शुरू कर दिए थे। बनारस की रेशमी साड़ियां, मुरादाबाद का पीतल उद्योग, भदोही के कालीन, फिरोजाबाद का कांच, सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी और अनेक अन्य पारंपरिक उत्पादों की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी बढ़ने लगी।

केंद्र सरकार ने महसूस किया कि यदि यही अवधारणा पूरे देश में लागू की जाए, तो भारत का प्रत्येक जिला अपनी आर्थिक क्षमता के अनुरूप विकास कर सकता है। यही कारण है कि उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया और राज्यों के सहयोग से प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों की पहचान का व्यापक अभियान शुरू किया। आज स्थिति यह है कि देश के 773 जिलों में 1,244 उत्पादों की पहचान की जा चुकी है। इसका अर्थ यह है कि अब विकास प्रत्येक जिले की अपनी आर्थिक पहचान बता रहा है।

'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' की सबसे बड़ी सफलता यह है कि इसने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार मुहैया कराया है। केंद्र सरकार ने ओडीओपी को 'डिस्ट्रिक्ट्स ऐज एक्सपोर्ट हब्स' पहल से जोड़ दिया है। इस संबंध में वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद का कहना है, “देश के 734 जिलों में निर्यात की दृष्टि से संभावनाशील उत्पादों और सेवाओं की पहचान की जा चुकी है। तय लक्ष्य को धरातल पर उतारने के लिए सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्टेट एक्सपोर्ट प्रमोशन कमेटी (एसईपीसी) तथा डिस्ट्रिक्ट एक्सपोर्ट प्रमोशन कमेटी (डीईपीसी) का गठन किया गया है। इतना ही नहीं, 249 जिला निर्यात कार्य योजनाएं (डीईएपी) तैयार की जा चुकी हैं, जिनका उद्देश्य उत्पादन, गुणवत्ता, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, विपणन और निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला को व्यवस्थित करना है। इस तरह से यह पहली बार है, जब भारत की निर्यात नीति गांव, कस्बे और जिले तक पहुंची है।”

बाजार तक पहुंच बनी सबसे बड़ी ताकत

जितिन प्रसाद कहते हैं, “सरकार ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर विशेष ओडीओपी स्टोरफ्रंट विकसित किया है, जहां 500 से अधिक उत्पाद श्रेणियों में 1,300 से अधिक उत्पाद उपलब्ध हैं। इससे सरकारी खरीद प्रणाली में स्थानीय उत्पादों को भी स्थान मिला है। इसके साथ-साथ दस से अधिक राज्यों ने अपने समर्पित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जिससे छोटे उत्पादक सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच रहे हैं।”

उन्होंने बताया, “राष्ट्रीय व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों और खरीदार-विक्रेता सम्मेलनों ने भी इन उत्पादों को नई पहचान दी है। आज अनेक ऐसे कारीगर हैं, जिनके उत्पाद कभी सिर्फ स्थानीय हाट या मेले तक सीमित रहा करते थे, लेकिन अब वे देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों तक पहुंच रहे हैं।”

भारत की सांस्कृतिक विरासत भी है अब वैश्विक ब्रांड

उल्लेखनीय है कि 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) आज देश को आर्थिक लाभ तो पहुंचा ही रहे हैं, वह भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक पहचान दिलाने का माध्यम बने हैं। विदेश मंत्रालय और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के सहयोग से अनेक देशों में ओडीओपी उत्पादों की प्रदर्शनियां आयोजित की जा रही हैं। भारतीय दूतावासों में 'ओडीओपी वॉल' स्थापित की गई हैं। सिंगापुर में दो और कुवैत में एक अंतरराष्ट्रीय रिटेल स्टोर पर भारतीय ओडीओपी उत्पादों की बिक्री इसका प्रमाण है कि स्थानीय उत्पाद अब वैश्विक उपभोक्ताओं को भी आकर्षित कर रहे हैं।

केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए अनेक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों के दौरान विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों को दिए जाने वाले आधिकारिक उपहारों में भी ओडीओपी उत्पादों को शामिल किया है। कूटनीति और संस्कृति के इस संगम ने भारतीय उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग को नई गति दी है। इससे दुनिया के सामने भारत विशिष्ट पारंपरिक उत्पादों और उत्कृष्ट हस्तकला वाले देश के रूप में भी उभर रहा है।

देश के वरिष्ठ आर्थिक विश्लेषक प्रहलाद सबनानी कहते हैं, “इन दिनों जिस तरह से प्रत्येक जिला अपनी विशिष्ट क्षमता के आधार पर उत्पादन, गुणवत्ता और निर्यात का केंद्र बनता जा रहा है, उसे देखते हुए यही लगता है कि भारत का विकास अधिक संतुलित, समावेशी और टिकाऊ होता जा रहा है। जिसमें कि आज ओडीओपी 'डिस्ट्रिक्ट-ड्रिवन इकोनॉमिक डेवलपमेंट मॉडल' के रूप में दिखता है।”

इसके साथ ही सबनानी का कहना यह भी है, “इस योजना ने लाखों कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों, किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और सूक्ष्म उद्यमियों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ा है। इससे रोजगार के नए अवसर बने हैं, स्थानीय आय में वृद्धि हुई है और गांवों से शहरों की ओर पलायन को भी नियंत्रित करने में सहायता मिली है। वास्तव में, 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' ने भारत के विकास का विमर्श बदल दिया है।”

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

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