बेहतर नागरिक और जागरूक समाज गढ़ने का सशक्त माध्यम है बाल रंगमंच : चित्तरंजन त्रिपाठी
नई दिल्ली, 04 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने शनिवार को कहा कि बाल रंगमंच केवल मनोरंजन नहीं है, यह भारत के भावी नागरिकों को गढ़ने और एक जागरूक समाज का निर्माण करने की एक मजबूत सीढ़ी है।
चित्तरंजन त्रिपाठी ने यह बात एनएसडी और दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति में आयोजित 'रंग अम्लान 2026' बाल रंग महोत्सव एवं कार्यशाला के विशेष नाट्य प्रदर्शनों के उद्घाटन के अवसर पर कही। इसका उद्देश्य बच्चों में रंगमंच के प्रति रुचि विकसित करना, उन्हें गुणवत्तापूर्ण रंगमंचीय प्रशिक्षण का अनुभव कराना और उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने कहा, भारत के भावी नागरिकों के निर्माण और एक स्वस्थ समाज की रचना में 'बाल रंगमंच' की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। थियेटर को हर वर्ग तक पहुँचाने और इसे समावेशी बनाने की एक अनूठी पहल की गई है। इसके अंतर्गत अब छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, कश्मीर की पंडित कॉलोनी के कामकाजी परिवारों के बच्चों और सुधार गृहों के बच्चों को भी रंगमंच से जुड़ने का मौका मिला है।
चित्तरंजन ने जानकारी देते हुए बताया कि एनएसडी ने अपनी 'संस्कार रंग टोली' (टीआईई कंपनी) और बाल नाट्य प्रकोष्ठ के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में, विशेषकर ग्रामीण, जनजातीय और शहरी क्षेत्रों के वंचित समुदायों के लिए वर्ष 2026 की गर्मियों में 100 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित की हैं।
महोत्सव का शुभारम्भ आज शाम करीब 6:00 बजे निशा त्रिवेदी द्वारा निर्देशित नाटक 'शांति की पुकार' के मंचन से हुआ। 5-9 जुलाई तक प्रतिदिन शाम 7:15 बजे नाट्य प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएँगी।
महोत्सव के अंतर्गत 5 जुलाई को जयंत राभा द्वारा निर्देशित नाटक 'प्रेमचंद की लड़कियाँ', 6 जुलाई को गुलशन वालिया द्वारा निर्देशित 'भूतनगरी', 7 जुलाई को पराग सरमा द्वारा निर्देशित 'जाके जाके उड़ी जाई सराई (झुंड के झुंड चिड़ियाँ उड़ जाती हैं)', 8 जुलाई को विक्रम सिंह द्वारा निर्देशित 'रिबिके, ग्रीन बियर्डेड किंग एंड जायंट बीन स्टॉक' तथा 9 जुलाई को हिम्मत सिंह नेगी निर्देशित 'मोबाइल-आ? सूर?' का मंचन किया जाएगा।
इस कार्यशाला में कुल 155 बच्चे भाग ले रहे हैं, जिन्हें पाँच समूहों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक समूह में लगभग 30 से 33 प्रतिभागी हैं, जो अनुभवी रंगकर्मियों के मार्गदर्शन में अभिनय और थियेटर की बारीकियों को सीख रहे हैं।
कार्यशाला का समापन 10 जुलाई राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के में होगा, जहाँ कार्यशाला के सभी पाँच समूह अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रशिक्षण के दौरान अर्जित रचनात्मकता, आत्मविश्वास, सामूहिकता तथा रंगमंचीय कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

