एनएसडी का भारत रंग महोत्सव 27 जनवरी-20 फरवरी तक, दुनिया का सबसे बड़ा रंगमंच का मेला

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एनएसडी का भारत रंग महोत्सव 27 जनवरी-20 फरवरी तक, दुनिया का सबसे बड़ा रंगमंच का मेला


-एनएसडी अपना रेडियो स्टेशन, पॉडकास्ट और ओटीटी चैनल लॉन्च करेगा

नई दिल्ली, 22 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने गुरुवार को कहा कि भारत रंग महोत्सव में इस साल एनएसडी अपना रेडियो स्टेशन, पॉडकास्ट और ओटीटी चैनल लॉन्च करने जा रहा है। इसके माध्यम से विश्वभर के लोग भारतीय रंगमंच की धरोहर और नाटकों को डिजिटली देख और सुन सकेंगे।

एनएसडी निदेशक ने यह बात नई दिल्ली स्थित एनएसडी में शुरू होने वाले भारत रंग महोत्सव को लेकर आयोजित प्रेसवार्ता में कही।उन्होंने बताया कि महोत्सव का 25वां संस्करण इस वर्ष 27 जनवरी से शुरु होकर 20 फरवरी तक चलेगा। यह दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय थिएटर महोत्सव है। इसका उद्देश्य भारतीयों को उनकी हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत, भाषाई विविधता और कलात्मक कौशल से रूबरू कराना है।

उन्होंने कहा, मुझे खुशी है कि हम इस थिएटर महोत्सव को राष्ट्रीय राजधानी से दूर के भारतीय शहरों में आयोजित कर रहे हैं। ऐसे स्थान जहां लोगों का थिएटर तक पहुंच बहुत सीमित है या कुछ मामलों में तो बिल्कुल भी नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारी आयोजन नहीं बल्कि 'ऑफ द पीपल, बाई द पीपल' महोत्सव है। एनएसडी का उद्देश्य भारत की समृद्ध नाट्य परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करना है।

एनएसडी के उपाध्यक्ष भरत गुप्त ने कहा कि यह महोत्सव वास्तव में अखंड सांस्कृतिक कथा के साथ एक साझा रचनात्मक भारतीय लोकाचार का प्रतीक है। इसमें प्राचीन से आधुनिक काल और शहरों से लेकर सुदूर गांव व जंगलों तक की समृद्ध परंपराओं को शामिल किया गया है।

इस वर्ष लगभग सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं (मैथिली, भोजपुरी, संस्कृत एवं अन्य) और कई आदिवासी तथा लुप्तप्राय भाषाओं के साथ तुलु, उर्दू, ताई खामती और नईशी को शामिल कर भाषाई कैनवास का विस्तार किया गया है। अपनी राष्ट्रीयता को चिह्नित करते हुए पहली बार इस महोत्सव में कई केंद्र जोड़े गए हैं। जिनमें केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और अंडमान भी शामिल है।

महोत्सव का 136 चयनित नाटकों और शेष आमंत्रित प्रस्तुतियों के साथ-साथ 7 महाद्वीपों से 12 विदेशी प्रस्तुतियों सहित कुल 277 भारतीय प्रस्तुतियों का देशभर के 40 केंद्रों में मंचन किया जाना है, जिसमें 228 भाषाओं और बोलियों में प्रदर्शन शामिल होंगे। चयनित नाटक विभिन्न थिएटर समूहों के 817 राष्ट्रीय और 34 अंतरराष्ट्रीय आवेदनों के स्क्रीनिंग का परिणाम हैं। इसके अलावा महोत्सव में 19 विश्वविद्यालय प्रस्तुतियाँ और 14 स्थानीय प्रस्तुतियाँ भी प्रदर्शित की जाएँगी। श्रुति के तहत 17 किताबों का लोकार्पण किया जायेगा।

यह पहला अवसर है महोत्सव में कुल 238 नाटकों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिनमें बांग्ला (19), अंग्रेजी (6), गुजराती (3), हिंदी (111) और अन्य क्षेत्रीय व विदेशी भाषाएं शामिल हैं। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों जैसे असम (8), बिहार (3), दिल्ली (62), गुजरात (6), हरियाणा (9), कर्नाटक (10) और महाराष्ट्र (35) के नाटकों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, 14 देशों जैसे अमेरिका, नेपाल, श्रीलंका, रूस, इटली, और स्पेन के नाटक शामिल हैं। महोत्सव में जनजातीय नाटक (3), नृत्य नाटक (5), और शास्त्रीय नाटक (5) जैसी विभिन्न श्रेणियां भी रखी गई हैं। इस बार रिकॉर्ड 33 महिला निर्देशकों के नाटकों को प्रदर्शित किया जाएगा। यह महोत्सव भारत के 64 अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किया जाएगा।टिकट बुक माई शो पर उपलब्ध है।

​इस बार का भारत रंग महोत्सव कई महत्वपूर्ण महोत्सवों का संगम बनकर आ रहा है। इस समागम में आदि रंग महोत्सव, जश्ने बचपन, बाल संगम, पूर्वोत्तर नाट्य समारोह, पपेट थिएटर, डांस ड्रामा, क्लासिकल ड्रामा फेस्टिवल, माइक्रो ड्रामा फेस्टिवल, पहली चार, ट्रांसजेंडर समुदायों, यौनकर्मियों, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य कम प्रतिनिधित्व वाले सामाजिक समूहों द्वारा भी थिएटर प्रस्तुतियां शामिल हैं।

​यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा, लोकमाता अहिल्याबाई और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का स्मृति वर्ष है। इस भारत रंग महोत्सव में इन विभूतियों की स्मृति में उनके जीवन पर आधारित नाटकों का मंचन भी किया जा रहा है। कई महत्वपूर्ण विभूतियाँ जैसे रतन थियम, बंसी कौल, देवेंद्र राज अंकुर, आलोक चटर्जी, जिन्होंने आधुनिक भारतीय रंगमंच को दिशा दी, भारत रंग महोत्सव उनके रंगमंच के योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि स्वरूप उनके नाटकों का मंचन करने जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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