तुगलकाबाद–पलवल सेक्शन पर कवच प्रणाली की कमीशनिंग का निरीक्षण
नई दिल्ली, 30 जनवरी (हि.स.)। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा ने शुक्रवार को तुगलकाबाद जंक्शन केबिन (दिल्ली क्षेत्र) से पलवल सेक्शन तक स्वदेशी कवच प्रणाली (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) के इंस्टॉलेशन और सफल कमीशनिंग का निरीक्षण किया। चार लाइन वाले इस लगभग 35 किलोमीटर लंबे हाई-डेंसिटी सेक्शन में कुल 152 मेन लाइन ट्रैक किलोमीटर शामिल हैं।
उत्तर रेलवे ने इस पूरे कॉरिडोर में कवच प्रणाली स्थापित की है, जिसके अंतर्गत प्रमुख स्टेशन यार्ड, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली से युक्त दो मेन लाइनें तथा एब्सोल्यूट ब्लॉक सिग्नलिंग वाली दो लाइनें शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान इस सेक्शन में कवच सिस्टम को सफलतापूर्वक चालू किया गया।
कवच प्रणाली की कार्यक्षमता की जांच के लिए निरीक्षण के दौरान कुल पांच महत्वपूर्ण परीक्षण किए गए। सिग्नल पासिंग एट डेंजर (एसपीएडी) टेस्ट में रेड सिग्नल पार करने का प्रयास करते ही कवच सिस्टम ने सिग्नल से पहले ही लोको को रोक दिया। हेड ऑन कोलिजन टेस्ट के तहत एक ही लाइन पर दो लोको रखे गए, जहां कवच प्रणाली ने निर्धारित सुरक्षित दूरी से पहले ही दोनों लोको को रोक दिया।
रियर एंड कोलिजन टेस्ट में लोको के पीछे की ओर फिसलने की स्थिति उत्पन्न की गई, जिसमें कवच प्रणाली ने पीछे से टक्कर की संभावना को समाप्त करते हुए लोको को पीछे जाने से रोक दिया। लूप लाइन ओवरस्पीड टेस्ट के दौरान 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से लूप लाइन में प्रवेश करने पर कवच सिस्टम ने स्वतः गति को 20 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित कर दिया। वहीं, लेवल क्रॉसिंग प्रोटेक्शन टेस्ट में फाटक खुले होने की स्थिति में कवच प्रणाली ने लोको को फाटक से पहले ही रोक दिया।
उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि यह कमीशनिंग भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर में से एक पर एक बड़ा संरक्षा उन्नयन है, जो दिल्ली उपनगरीय और लंबी दूरी के रेल नेटवर्क को कवर करता है। उन्होंने कहा कि इस सेक्शन पर कवच प्रणाली की कमीशनिंग से परिचालन संरक्षा, विश्वसनीयता और यात्रियों का भरोसा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।
कवच एक उन्नत ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जिसे आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत देश में ही विकसित किया गया है। यह प्रणाली आपात स्थितियों में स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर सिग्नल पासिंग एट डेंजर, आमने-सामने और पीछे से टक्कर जैसी घटनाओं को रोकने में सक्षम है। साथ ही, यह ओवरस्पीडिंग पर लगातार निगरानी रखती है और कम दृश्यता व खराब मौसम की परिस्थितियों में भी रेल परिचालन को सुरक्षित बनाती है।
कवच प्रणाली एसआईएल-4 संरक्षा मानकों के अनुरूप कार्य करती है, जो वैश्विक स्तर पर संरक्षा का सर्वोच्च मानक है। स्वदेशी और किफायती तकनीक होने के कारण यह आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ भारतीय सिग्नलिंग उद्योग को भी प्रोत्साहित करती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

