उत्तर रेलवे ने ओएचई अपग्रेडेशन कार्यों के लिए चार स्थानों पर लगाए संरक्षा एवं गुणवत्ता शिविर, 550 कर्मचारी हुए शामिल
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर रेलवे ने रेलवे की ढांचागत परियोजनाओं में संरक्षा मानकों के अनुपालन और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 2x25 केवी ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) अपग्रेडेशन कार्यों को लेकर संरक्षा एवं गुणवत्ता संगोष्ठी-सह-संवाद शिविरों का आयोजन किया। अक्टूबर में आयोजित इस विशेष अभियान के तहत जालंधर, अंबाला, मुरादाबाद और लखनऊ में शिविर लगाए गए, जिनमें कुल 550 अधिकारी-कर्मचारियों ने भाग लिया।
ये शिविर एक अक्टूबर को जालंधर, पांच अक्टूबर को अंबाला, नौ अक्टूबर को मुरादाबाद और 12 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित किए गए। इनमें 42 अधिकारी, मंडलीय ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन (टीआरडी) विभाग के 169 कर्मचारी, अंबाला और लखनऊ की विद्युतीकरण परियोजना इकाइयों के 112 कर्मचारी तथा ठेकेदारों और एजेंसियों के 227 कर्मचारी शामिल हुए।
शिविरों में तकनीकी प्रस्तुतियों और संवाद सत्रों के माध्यम से ओएचई अपग्रेडेशन कार्यों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें कर्मचारियों की व्यक्तिगत सुरक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) का अनिवार्य उपयोग, सुरक्षित कार्य संस्कृति और जोखिमपूर्ण गतिविधियों से बचाव पर विशेष जोर दिया गया।
रेलवे ट्रैक के नजदीक क्रेन, जेसीबी और उत्खनन मशीनों के सुरक्षित संचालन के साथ-साथ ट्रैक, सिग्नलिंग, दूरसंचार प्रणालियों और अन्य रेल परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए स्वीकृत ड्राइंग, तकनीकी विनिर्देशों और निर्धारित प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता बताई गई। फाउंडेशन कास्टिंग, मास्ट इरेक्शन, एलाइनमेंट और ग्राउटिंग के दौरान सुरक्षा एवं गुणवत्ता मानकों की जांच को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
शिविरों में मौजूदा रेल बुनियादी ढांचे और विद्युत चालित ओएचई के नजदीक फीडर वायर, एईसी और बीईसी से संबंधित कार्यों को सुरक्षित तरीके से संपन्न करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा प्रतिकूल मौसम में आवश्यक सावधानियों, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली, दुर्घटना की रिपोर्टिंग और बचाव व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जानकारी साझा की गई।
रेल अधिकारियों, परियोजना इकाइयों के कर्मचारियों, पर्यवेक्षकों और ठेकेदारों की भूमिकाओं एवं जवाबदेही को स्पष्ट करते हुए कहा गया कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण कार्य निष्पादन के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। प्रतिभागियों ने क्षेत्र में सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, संभावित खतरों और पूर्व में हुई संरक्षा संबंधी घटनाओं से मिले अनुभवों को भी साझा किया, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
उत्तर रेलवे की इस पहल का उद्देश्य कार्य शुरू होने से पहले संभावित खतरों की पहचान करना, जोखिम कम करना, तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करना और कर्मचारियों में संरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। शिविरों के माध्यम से रेलवे अधिकारियों, परियोजना इकाइयों और अनुबंधित एजेंसियों के बीच संवाद एवं समन्वय को भी मजबूत किया गया।
उत्तर रेलवे ने स्पष्ट किया कि महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं का निष्पादन निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप करना, कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, निर्बाध ट्रेन परिचालन बनाए रखना और रेलवे परिसंपत्तियों की संरक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
रेलवे का मार्गदर्शक सिद्धांत है संरक्षा पहले, गुणवत्ता हमेशा, कोई शॉर्टकट नहीं और कोई समझौता नहीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

