(अपडेट) नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री का जल संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान
नई दिल्ली, 11 जून (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में अल-नीनो की संभावित चुनौतियों को देखते हुए जल संरक्षण तथा प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने आकांक्षी जिलों के मानकों के आधार पर प्रगति के मूल्यांकन और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य के लिए स्पष्ट निगरानी व्यवस्था, 100-दिवसीय तथा पांच वर्षीय लक्ष्यों की आवश्यकता पर जोर दिया। नीति आयोग की शीर्ष बैठक में पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद बैठक की अध्यक्षता की। इस साल का विषय ‘विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ था। इसमें 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उप-राज्यपाल और प्रशासक शामिल हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित भारत@2047 का संकल्प देश के हर राज्य, जिले, ब्लॉक और गांव का सामूहिक लक्ष्य बनना चाहिए। उन्होंने 70 करोड़ युवाओं को भारत की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए राज्यों से जनसांख्यिकीय लाभांश को विकास लाभांश में बदलने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने युवाओं और एमएसएमई के लिए अवसर बढ़ाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने, एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) और रक्षा विनिर्माण को प्रोत्साहन देने पर बल दिया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अवसर बताते हुए भविष्य उन्मुख कौशल विकास, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती तथा साइबर अपराध और नशे जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता बताई।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार बैठक में मुख्यमंत्रियों, उप-राज्यपालों व प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके पद पर 12 साल पूरे करने पर बधाई दी। उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और ऊर्जा जरूरतों के मामले में भारत की मजबूती बढ़ाने और विकास की गति को बनाए रखने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता भी व्यक्त की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि चर्चाएं रचनात्मक थीं और इनमें राज्यों की आकांक्षाओं, उम्मीदों, अनुभवों, बेहतरीन तौर-तरीकों और चुनौतियों की झलक मिली। प्रधानमंत्री ने बैठक में भाग लेने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों, उप-राज्यपालों और प्रशासकों का आभार व्यक्त किया और भरोसा जताया कि सहयोग, इनोवेशन और विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता के जरिए भारत 2047 तक 'विकसित भारत' की अपनी यात्रा को तेज कर सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, भारत की विकास गाथा दुनिया को प्रेरित कर रही है। उन्होंने आत्मनिर्भरता के प्रति देश के संकल्प को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया और वैश्विक स्तर पर अपनाए जाने वाले सर्वोत्तम तरीकों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) को अपनाने और लागू करने के महत्व को रेखांकित किया, खासकर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में।
सहकारी संघवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि 'विकसित भारत' का विजन हर राज्य, जिले, ब्लॉक और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अल-नीनो (अल नीनो) की स्थितियों से जुड़ी चिंताओं की ओर भी ध्यान दिलाया और राज्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने और प्राकृतिक व जैविक खेती के तरीकों को प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा खरीफ़ सीजन के दौरान किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद टिकाऊ खेती में बढ़ते भरोसे को दिखाती है।
प्रधानमंत्री ने ज़िला स्तर पर, खासकर आकांक्षी जिलों के पैमानों के जरिए प्रगति का मूल्यांकन करने की जरूरत पर ज़ोर दिया। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि इसी तरह, सकारात्मक नतीजे लाने के लिए कृषि के क्षेत्र में भी 100 ज़िलों की पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने राज्यों से इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया ताकि 'एस्पिरेशनल अप्रोच' (आकांक्षी दृष्टिकोण) के जरिए जबरदस्त बदलाव लाया जा सके।
प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत@2047’ के विजन को हासिल करने के लिए एक मॉनिटरिंग फ़्रेमवर्क और 100-दिन व पाँच-साल के तय लक्ष्यों की जरूरत पर ज़ोर दिया।
भारत की जनसांख्यिकीय संरचना (डेमोग्राफिक प्रोफाइल) की ताकत पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवा इसकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं, जिसमें 25 वर्ष से कम आयु के लगभग 70 करोड़ भारतीय शामिल हैं। इसे 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' (जनसांख्यिकीय लाभांश) बताते हुए, उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण की पहलों के माध्यम से इसे ‘विकास लाभांश’ में बदलने पर ध्यान केंद्रित करें, ताकि युवाओं को भविष्य के अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।
कई देशों के साथ भारत के हालिया व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने राज्यों को युवाओं और एमएसएमई के लिए अवसर पैदा करने और हितधारकों को इन समझौतों से मिलने वाले लाभों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राज्यों से सहयोगी देशों से निवेश आकर्षित करने के लिए सक्रिय रूप से काम करने का भी आग्रह किया।
महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने राज्यों से 'लखपति दीदियों' की संख्या 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया और 'नारी शक्ति' के लिए सुरक्षित और संरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने राज्यों से ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) पहल पर ध्यान केंद्रित करने और इसके इर्द-गिर्द निर्यात-उन्मुख रणनीतियां विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने रक्षा विनिर्माण को एक उभरते हुए क्षेत्र के रूप में भी रेखांकित किया, जहां भारत अपनी एक अलग पहचान बना रहा है, और राज्यों को इसके विकास से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने के लिए नीतियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रधानमंत्री ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए रोकथाम के उपायों, जागरूकता अभियानों और प्रभावी गवर्नेंस के जरिए मिलकर प्रयास करने की जरूरत पर ज़ोर दिया।
निवेश आकर्षित करने के लिए अच्छे गवर्नेंस, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने राज्यों से ब्रांडिंग, ‘ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस’ और डेटा सेंटर व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी कौशल से लोगों को लैस करने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

