मुजफ्फरनगर में जबरन काम कराने के मामले को लेकर मानवाधिकार का उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस

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मुजफ्फरनगर में जबरन काम कराने के मामले को लेकर मानवाधिकार का उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस


नई दिल्ली, 02 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की उस घटना का स्वतः संज्ञान लिया है, जहां एक कारखाने में डेढ़ साल तक 12 बंधुआ मजदूरों के साथ मारपीट और उन्हें पर्याप्त भोजन तथा मजदूरी के बिना आधी रात तक उनसे जबरन काम कराया गया है। इस मामले को लेकर आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार मुजफ्फरनगर जिले के मंडी गांव में स्थित एक पेपर प्लेट निर्माण कारखाने में काम कर रहे कई मजदूरों में से एक मजदूर कारखाने से भागने में सफल रहा और उसने तितावी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अन्य मजदूरों को बचाया जा सका। उनकी चिकित्सा जांच में कई चोटें पाई गईं, जिनमें खरोंच, घाव, हड्डियां टूटना और लंबे समय तक शारीरिक शोषण के लक्षण शामिल हैं। पुलिस को पता चला है कि एक व्यक्ति की मौत भी हो गई है और भी मौतों की आशंका की जांच जारी है।

खबरों के मुताबिक, पीड़ित उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड सहित विभिन्न राज्यों के थे और उनमें से कुछ नेपाल से भी थे। कारखाने पहुंचने पर उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र कथित तौर पर जब्त कर लिए गए, जिससे वे अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पाए। इसके अलावा, मजदूरों को डराने और उन्हें भागने से रोकने के लिए पिट बुल कुत्तों का इस्तेमाल किया गया था।

आयोग ने मुजफ्फरनगर जिला मजिस्ट्रेट को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रिया और बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के अनुसार मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही, 8 दिसंबर 2021 की अपनी सलाह 2.0 के अनुसार श्रमिकों को ई-श्रम पोर्टल पर तत्काल पंजीकृत करने का भी निर्देश दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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