एनजीटी ने कुल्लू में ट्राउट फिश फार्म को हुए नुकसान पर 47.14 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया
नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित हिमालयन ट्राउट फिश फार्म को हुए पर्यावरणीय नुकसान के मामले में 47.14 लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया है।
यह आदेश मूल आवेदन संख्या 383/2024 में पारित किया गया, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव अध्यक्ष तथा डॉ. ए. सेंथिल वेल विशेषज्ञ सदस्य की पीठ ने की।
अधिकरण ने पाया कि हरिपुर नाला पर पुल निर्माण के दौरान हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग और उसके ठेकेदार द्वारा मलबा एवं गाद अवैध रूप से नाले में डाली गई, जिससे जल प्रदूषण हुआ। इसके परिणामस्वरूप ट्राउट मछलियों और उनके अंडों को गंभीर क्षति पहुंची तथा बड़ी संख्या में मछलियों की मृत्यु हुई।
एनजीटी ने इसे जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 24 का उल्लंघन माना। समय-सीमा को लेकर उठाई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए अधिकरण ने कहा कि कोविड-19 अवधि तथा पूर्व उच्च न्यायालय की कार्यवाही में व्यतीत समय को सीमांकन से बाहर रखा जाएगा।
अधिकरण ने मत्स्य विभाग, राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्टों के आधार पर पर्यावरणीय क्षति को प्रमाणित माना।
एनजीटी ने प्रतिवादी संख्या 2 (एचपीपीडब्ल्यूडी) और प्रतिवादी संख्या 3 (ठेकेदार) को संयुक्त एवं पृथक रूप से 47,14,000 रुपये की राशि दो माह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया। साथ ही राज्य विभाग को ठेकेदार से उक्त राशि वसूलने की स्वतंत्रता प्रदान की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

