निजी क्षेत्र में भी चाइल्ड केयर लीव और अनिवार्य पितृत्व अवकाश की एनसीडब्ल्यू की सिफारिश

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निजी क्षेत्र में भी चाइल्ड केयर लीव और अनिवार्य पितृत्व अवकाश की एनसीडब्ल्यू की सिफारिश


नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (हि.स.)।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने मातृत्व और बच्चों की देखभाल से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की सिफारिश की है। आयोग ने केंद्र सरकार को निजी क्षेत्र में भी जेंडर न्यूट्रल चाइल्ड केयर लीव लागू करने, सभी क्षेत्रों में अनिवार्य सवैतनिक पितृत्व अवकाश देने और वर्ष 2030 तक 5 लाख क्रेच सीटें तैयार करने का प्रस्ताव दिया है।

आयोग ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को अपनी सिफारिशें भेजी हैं। मातृत्व और बाल देखभाल से जुड़े कानूनों पर तैयार रिपोर्ट में 9 प्रमुख क्षेत्रों में 37 सिफारिशें की गई हैं। इनका उद्देश्य मातृत्व सुरक्षा को व्यापक बनाने के साथ बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी माता-पिता के बीच साझा करना और महिलाओं के लिए परिवार के अनुकूल कार्यस्थल तैयार करना है।

730 दिन की चाइल्ड केयर लीव दोनों माता-पिता को देने का प्रस्ताव

आयोग ने मौजूदा महिला-केंद्रित चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) व्यवस्था को बदलकर इसे जेंडर न्यूट्रल बनाने की सिफारिश की है। प्रस्ताव के अनुसार मौजूदा 730 दिनों की सीसीएल को दोनों कामकाजी माता-पिता के बीच बांटा जा सकता है। इसमें प्रत्येक अभिभावक को 365-365 दिन देने या एक ही संस्थान में काम करने वाले माता-पिता के लिए साझा पूल बनाने का विकल्प सुझाया गया है।

0 से 2 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए प्राथमिक और द्वितीयक देखभालकर्ता के बीच 60:40 के साझा देखभाल मॉडल का भी प्रस्ताव है।

2030 तक 5 लाख क्रेच सीटों का लक्ष्य

महिलाओं की रोजगार में निरंतर भागीदारी के लिए बच्चों की देखभाल की सुविधाओं को महत्वपूर्ण बताते हुए आयोग ने राष्ट्रीय चाइल्डकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू करने की सिफारिश की है। इसके तहत केंद्र और राज्यों के सहयोग से 2030 तक 5 लाख क्रेच सीटें तैयार करने का प्रस्ताव है।

क्रेच के लिए ऑन-साइट सुविधा, साझा या क्लस्टर आधारित क्रेच और राज्य चाइल्डकेयर फंड में योगदान जैसे विकल्प सुझाए गए हैं। एमएसएमई के लिए संसाधनों को साझा करने और कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम तथा लचीले कामकाज की सुविधा देने की भी सिफारिश की गई है।

निजी क्षेत्र में भी लागू हो सीसीएल

आयोग ने निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी चाइल्ड केयर लीव के दायरे में लाने का प्रस्ताव दिया है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सिफारिश है, जिसकी शुरुआत बड़े उद्योगों से और बाद में मध्यम तथा छोटे उद्यमों से की जा सकती है।

आयोग ने सीसीएल को सामाजिक सुरक्षा संहिता में शामिल कर निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को वैधानिक सुरक्षा देने तथा चाइल्डकेयर नीतियां लागू करने वाले नियोक्ताओं को कर प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता देने का भी सुझाव दिया है।

अनिवार्य सवैतनिक पितृत्व अवकाश

एनसीडब्ल्यू ने निजी और असंगठित क्षेत्रों में अनिवार्य सवैतनिक पितृत्व अवकाश लागू करने की सिफारिश की है। आयोग का कहना है कि बच्चों की देखभाल में पिता की भागीदारी को भी अधिकार के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। इसके साथ ही लचीली साझा अभिभावकीय छुट्टी की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया है।

गिग और असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को भी मातृत्व सुरक्षा

आयोग ने मातृत्व सुरक्षा का दायरा गिग, प्लेटफॉर्म और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं तक बढ़ाने की सिफारिश की है। इसके लिए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 109 को लागू करने और मातृत्व एवं चाइल्डकेयर फंड बनाने का प्रस्ताव है।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को सार्वभौमिक और कानूनी अधिकार के रूप में लागू करने की भी सिफारिश की गई है। जैविक, दत्तक और सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली महिलाओं के लिए मातृत्व लाभ में समानता की बात कही गई है।

दत्तक और सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली महिलाओं के लिए छुट्टी को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने का प्रस्ताव है।

नर्सिंग ब्रेक 15 से बढ़ाकर 30 मिनट करने की सिफारिश

स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए मौजूदा 15 मिनट के नर्सिंग ब्रेक को बढ़ाकर 30 मिनट करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा कार्यस्थलों पर अलग लैक्टेशन रूम बनाने और इन प्रावधानों के प्रभावी पालन के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का सुझाव दिया गया है।

आयोग ने सीसीएल में मौजूदा दो बच्चों की सीमा पर भी पुनर्विचार करने और तीसरे बच्चे को भी चरणबद्ध व्यवस्था के तहत इसके दायरे में लाने की सिफारिश की है।

मातृत्व के कारण करियर प्रभावित न हो

आयोग ने महिलाओं को मातृत्व और चाइल्ड केयर सुविधाओं का लाभ लेने के कारण नौकरी में भेदभाव से बचाने के लिए कड़े उपाय सुझाए हैं। रिपोर्ट में इस धारणा को बदलने की जरूरत बताई गई है कि सीसीएल लेने वाली महिलाएं अपने काम के प्रति कम प्रतिबद्ध होती हैं।

महिलाओं के करियर ब्रेक का पदोन्नति, वेतन और पेंशन पर पड़ने वाले असर को कम करने के उपाय करने की भी सिफारिश की गई है। आयोग ने नियोक्ताओं द्वारा नियमों का पालन नहीं करने पर शिकायत निवारण व्यवस्था, जागरूकता अभियान और दंडात्मक प्रावधानों को मजबूत करने का सुझाव दिया है।

आयोग की 37 सिफारिशों का व्यापक उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें बच्चों की देखभाल केवल महिलाओं की जिम्मेदारी न हो, मातृत्व सुरक्षा हर वर्ग की महिला तक पहुंचे और माता-पिता बनने के कारण महिलाओं के करियर पर प्रतिकूल असर न पड़े।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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