राष्ट्रीय महिला आयोग 500 जिलों में करेगा ‘महिला जन सुनवाई’ का आयोजन

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राष्ट्रीय महिला आयोग 500 जिलों में करेगा ‘महिला जन सुनवाई’ का आयोजन


नई दिल्ली, 06 मार्च (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) देशभर में महिलाओं के लिए जनसुनवाई के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रहा है। इस अभियान के तहत आयोग की तरफ से 500 जिलों में महिला जन सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन होगा, जो हफ्ते भर चलेगा। यह पहल आयोग के प्रमुख जनसंपर्क कार्यक्रम “राष्ट्रीय महिला आयोग आपके द्वार” का विस्तार है।

राष्ट्रीय महिला आयोग में शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि इन जन सुनवाइयों के माध्यम से हम सीधे महिलाओं की बात सुनना, उनकी शिकायतों का समाधान करना और व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करना चाहते हैं।

इस ऐतिहासिक जनसंपर्क अभियान के तहत देशभर के लगभग 500 जिलों में 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कवर किया जाएगा, जो भारत में महिलाओं के लिए आयोजित सबसे बड़े समन्वित सार्वजनिक शिकायत निवारण अभियानों में से एक होगा।

उन्होंने कहा कि

इस पहल की एक महत्वपूर्ण विशेषता उत्तर प्रदेश की व्यापक भागीदारी है, जहां 75 जिलों में महिला जन सुनवाई आयोजित की जाएगी, जिससे जमीनी स्तर पर महिलाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित होगी। मणिपुर में भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पांच महिला जन सुनवाई आयोजित की जाएंगी।

अन्य कई राज्य भी इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

विजया रहाटकर ने बताया कि आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 9 से 13 मार्च 2026 के बीच पांच-पांच जिलों में सुनवाई होगी। केरल और मणिपुर में भी पांच-पांच जिलों में कार्यक्रम आयोजित होंगे। त्रिपुरा में 8 से 13 मार्च के बीच सभी आठ जिलों में सुनवाई होगी, जबकि ओडिशा में 6 से 23 मार्च के बीच आठ जिलों में जन सुनवाई आयोजित की जाएगी। नागालैंड में 9 से 13 मार्च के बीच 11 जिलों में और उत्तराखंड में 9 से 13 मार्च के बीच पांच जिलों में महिला जन सुनवाई आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष का पद फिलहाल रिक्त है, वहां स्वयं

महिला जन सुनवाई आयोजित करेंगी, ताकि उन क्षेत्रों की महिलाओं को भी सीधे शिकायत निवारण व्यवस्था तक पहुंच मिल सके। इन राज्यों में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और झारखंड शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि

इस देशव्यापी प्रयास के माध्यम से आयोग का लक्ष्य लगभग 15,000 शिकायतों का समाधान करना है, जिनमें प्रत्यक्ष रूप से दर्ज कराई गई शिकायतें और पहले से पंजीकृत मामले दोनों शामिल होंगे। इससे महिलाओं को समय पर सहायता मिलेगी और संस्थागत प्रतिक्रिया तंत्र भी मजबूत होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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